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ट्रेड वार का असर: अमेरिकी फैसले से बाजारों में मचा हाहाकार
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इतिहास के आईने में: जब आर्थिक फैसलों ने वैश्विक मंदी को जन्म दिया
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1929 से 2008 तक: चार बड़े झटके जिन्होंने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 60 देशों पर लगाए गए नए टैरिफ ने एक बार फिर वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। भारतीय शेयर बाजार को अब तक 19 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
1929: द ग्रेट डिप्रेशन – जब फूटा शेयर बाजार का बुलबुला
- कर्ज लेकर शेयर खरीदने की प्रवृत्ति ने बनाया बुलबुला
- 29 अक्टूबर 1929 को एक दिन में 13% गिरावट
- 3 साल में 9,000 बैंक दिवालिया, 1.5 करोड़ अमेरिकी बेरोजगार
- भारत के निर्यात और किसानों पर पड़ा भारी असर
1971: निक्सन शॉक – जब टूटा डॉलर-सोने का रिश्ता
- ब्रेटन वुड्स सिस्टम का अंत
- फ्रांस ने 3 साल में 3,313 टन सोना वापस लिया
- 15 अगस्त 1971 को अचानक टैरिफ लगाने का ऐलान
- यूरोप-एशिया के बाजारों में 3-5% गिरावट
1987: ब्लैक मंडे – कंप्यूटर ने बढ़ाई मुसीबत
- 19 अक्टूबर 1987 को एक दिन में 22.6% गिरावट
- अमेरिका में 500 अरब डॉलर का नुकसान
- हॉन्गकॉन्ग में 45.8%, ऑस्ट्रेलिया में 41.8% गिरावट
- कंप्यूटराइज्ड ट्रेडिंग ने बढ़ाया संकट
2008: द ग्रेट रिसेशन – लेहमैन ब्रदर्स का पतन
- सबप्राइम मॉर्टगेज संकट की शुरुआत
- लेहमैन ब्रदर्स का दिवालिया होना
- अमेरिकी शेयर बाजार में 50% से अधिक गिरावट
- भारत में 52% गिरावट, 10-15 लाख नौकरियां गईं
विशेषज्ञों की चेतावनी: संकट के संकेत फिर नजर आ रहे
- वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी
- भारतीय बाजार पर दबाव जारी
- निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह








