
- हिंदू संगठन बोले- सरकार में बढ़ रहा कट्टरपंथ
- मंदिर समिति ने कहा- बिना सूचना गिराया गया मंदिर
- 500 से अधिक लोगों की भीड़ ने पहले किया था हमला
ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के खिलखेत इलाके में स्थित दुर्गा मंदिर पर 26 जून को बुलडोजर चलाए जाने के बाद पूरे देश में विरोध तेज हो गया है। हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने शनिवार को बांग्लादेश बंद का आह्वान किया है। शुक्रवार को रथयात्रा के दिन कई शहरों में प्रदर्शन हुए और मानव श्रृंखला बनाई गई।
ढाका में हुए एक बड़े प्रदर्शन में हिंदू अलायंस के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने सरकार पर धार्मिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा,
“जहां मंदिर गिराया गया, वहां मस्जिदें और अवैध ढांचे भी मौजूद हैं, लेकिन सिर्फ मंदिर और मूर्ति को ही टारगेट किया गया। यह साबित करता है कि सरकार में कट्टरपंथी हावी हो चुके हैं।”
रेलवे ने बताया अवैध कब्जा, हिंदू संगठनों ने कहा- मंदिर था वैध
बांग्लादेश रेलवे अधिकारियों ने दावा किया है कि मंदिर रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर के साथ वहां बनी 100 दुकानें, राजनीतिक दफ्तर और एक बाजार भी हटाया गया।
हालांकि मंदिर समिति ने आरोप लगाया कि
“तीन दिन पहले 500 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने मंदिर पर हमला किया था, और अब प्रशासन ने बिना सूचना दिए बुलडोजर चला दिया।”
मंदिर समिति के सचिव अर्जुन रॉय ने कहा कि पिछले साल दुर्गा पूजा के लिए उन्होंने अस्थायी पूजा की अनुमति ली थी और मंदिर कोई स्थायी निर्माण नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ मंदिर को गिराया गया, जबकि बाकी ढांचे ज्यों के त्यों छोड़ दिए गए।
मूर्ति को सम्मान से विसर्जित करने का दावा, स्थानीय लोगों ने खारिज किया
रेलवे मंत्रालय के सलाहकार फौजुल कबीर खान ने सफाई देते हुए कहा कि मंदिर की मूर्ति को सम्मानपूर्वक बालु नदी में विसर्जित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने किसी एक समुदाय को टारगेट नहीं किया।
हालांकि स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि
“बुलडोजर सीधे मंदिर और मूर्ति पर चलाया गया। गुरुवार रात तक मूर्ति वहीं मलबे में पड़ी थी, किसी तरह का विसर्जन नहीं हुआ।”
बढ़ता विरोध और अल्पसंख्यकों की चिंता
देश के कई विश्वविद्यालयों और जिलों में अल्पसंख्यक समुदाय ने प्रदर्शन कर सरकार के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन हैं।
बांग्लादेश हिंदू महासंघ और अन्य संगठनों ने सरकार से तत्काल माफी और मंदिर दोबारा निर्माण की मांग की है।








