
अम्बेडकरनगर जिले की आलापुर तहसील क्षेत्र में कई ईंट भट्ठे निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित होने का मामला सामने आया है। आवासीय इलाकों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों के समीप भट्ठों के संचालन से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कई भट्ठे प्रदूषण नियंत्रण मानकों और निर्धारित दूरी के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। नियमानुसार दो ईंट भट्ठों के बीच कम से कम एक किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए, जबकि कुछ स्थानों पर यह दूरी कम बताई जा रही है।
निर्धारित मानकों की अनदेखी
मानक के अनुसार ईंट का आकार 190×90×90 मिमी तथा गारे का आकार 200×100×100 मिमी होना चाहिए। इसके अलावा भट्ठों के लिए 33 प्रतिशत भूमि पर वृक्षारोपण अनिवार्य है। आवासीय क्षेत्रों, स्कूल और अस्पताल से दूर स्थापना का प्रावधान भी लागू है।
भट्ठों में जिग-जैग तकनीक अपनाना, 12 से 17 मीटर ऊंची चिमनी का निर्माण तथा मजदूरों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराना भी अनिवार्य है। आरोप है कि कई संचालक इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी के निर्देश
ईंट भट्ठों के संचालन के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा पर्यावरणीय अधिनियमों के अनुपालन के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। सीपीसीबी ने जिग-जैग तकनीक अपनाने और इंड्यूस्ड ड्राफ्ट फैन लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे धुएं के उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने भी भट्ठा संचालकों को नोटिस जारी कर मानक पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।








