कजपुरा में विकास पर उठे सवाल

अम्बेडकरनगर। जनपद के जलालपुर विकासखंड के कजपुरा गांव में विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च होने के दावों के बीच जमीनी हकीकत उलट नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल, शौचालय, सफाई और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बदहाल हैं। करीब 5000 की आबादी और लगभग 2900 मतदाताओं वाले इस गांव की स्थिति ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

रीबोर पर लाखों खर्च, हैंडपंप अब भी बंद

गांव में पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर पर 12 लाख 85 हजार 994 रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया। इसके बावजूद अधिकांश हैंडपंप बंद पड़े हैं। कई स्थानों पर वर्षों से खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत नहीं कराई गई। जो हैंडपंप चालू हैं, उनसे निकलने वाले पानी की गुणवत्ता पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में मरम्मत और रीबोर दर्शाया गया, लेकिन वास्तविक सुधार दिखाई नहीं दे रहा। पेयजल संकट के कारण लोगों को निजी संसाधनों या दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

खुले चेंबर से बढ़ा हादसे का खतरा

गांव की गलियों में जल निकासी के लिए बनाए गए चेंबर बिना ढक्कन खुले पड़े हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार आए दिन कोई न कोई इनमें गिरकर चोटिल हो रहा है। जनवरी माह में रियाज और मोमिना के घायल होने की घटना के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग को जानकारी होने के बावजूद अब तक ढक्कन लगाने या मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया। इससे बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष खतरा बना हुआ है।

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