
अंबेडकरनगर। जिले में होली की तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों में खरीदारी की रौनक बढ़ी है, लेकिन इसी बीच होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ होकर 3 मार्च को होलिका दहन तक प्रभावी रहेगा। मंगलवार सुबह 7 बजकर 1 मिनट से होलाष्टक लग गया।
अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन विशेष माने जाते हैं
ज्योतिषाचार्य उत्कर्ष तिवारी के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक कहलाता है। इन आठ दिनों में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे शुभ कार्य इस अवधि में नहीं किए जाते। नई वस्तुओं की खरीदारी से भी परहेज करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इन दिनों ग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिसका प्रभाव मन और व्यवहार पर पड़ सकता है। अष्टमी से पूर्णिमा तक क्रमशः चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और राहु का प्रभाव बताया गया है। ज्योतिष मत के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है, सूर्य आत्मबल का, शनि कर्म और संघर्ष का तथा राहु भ्रम और आशंकाओं से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में निर्णय क्षमता और मानसिक स्थिरता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ग्रहों के प्रभाव को लेकर मान्यता
शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा से पहले के आठ दिनों में ग्रहों का प्रभाव क्रमशः तीव्र होता जाता है। इस दौरान व्यक्ति के मन में शंका, असमंजस और तनाव की स्थिति बन सकती है। यही कारण है कि इस समय को संयम और साधना का काल माना गया है। पूर्णिमा के दिन होलिका दहन के साथ इस अवधि का समापन होता है और इसके बाद वातावरण में उत्सव का आरंभ माना जाता है।








