फैनी मै की छंटनी में तेलुगु कर्मचारियों पर चौंकाने वाले आरोप

  • फैनी मै की बर्खास्तगी पर विवाद, तेलुगु कर्मचारियों के खिलाफ आरोप

  • तेलुगु कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी आरोपों के बाद फैनी मै ने उठाया कदम

  • फैनी मै के कर्मचारियों पर चैरिटी फंड घोटाले का आरोप, अमेरिकी सांसदों ने उठाए सवाल

वॉशिंगटन। अमेरिका की प्रमुख वित्तीय संस्था फैनी मै (Fannie Mae) ने हाल ही में बड़ी छंटनी करते हुए 700 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जिनमें से 200 को नैतिक आधार पर बर्खास्त किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कर्मचारियों पर चैरिटेबल मैचिंग ग्रांट्स प्रोग्राम के तहत फंड के दुरुपयोग और धोखाधड़ी में शामिल होने के आरोप हैं। बर्खास्त किए गए लोगों में बड़ी संख्या में तेलुगु समुदाय के लोग शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, कई कर्मचारी तेलुगु एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (TANA) से जुड़े हुए थे और उन्होंने कथित तौर पर कुछ धर्मार्थ संगठनों के साथ मिलकर फर्जी रिकॉर्ड बनाकर कंपनी के फंड को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया। इस पूरे मामले की जांच एफबीआई और अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा की जा रही है।

भारतीय मूल के सांसदों ने मांगा जवाब

इस घटना पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय में नाराज़गी देखी जा रही है। अमेरिकी कांग्रेस के तीन भारतीय मूल के सांसद – सुब्रमण्यम, राजा कृष्णमूर्ति और श्री थानेदार ने फैनी मै को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने लिखा, “हम हाल ही में फैनी मै द्वारा की गई बर्खास्तगी के बारे में जानकारी चाहते हैं। यह फैसला भारतीय-अमेरिकी समुदाय को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है। पूरी जांच के बिना दर्जनों तेलुगु कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है।”

फैनी मै की सफाई

फैनी मै की प्रेसिडेंट और सीईओ प्रिसिला अल्मोडोवर ने इस कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि कंपनी अपने कर्मचारियों से उच्च नैतिक मानकों की अपेक्षा रखती है। उन्होंने कहा, “हम उन लोगों की सराहना करते हैं जिन्होंने फैनी मै में अनैतिक आचरण को उजागर करने में मदद की। हम अपनी नैतिक ज़िम्मेदारियों को बहुत गंभीरता से लेते हैं और इसी मानक पर भविष्य में भी काम करेंगे।”

एपल की छंटनी से तुलना

गौरतलब है कि जनवरी में एपल ने भी अपने क्यूपर्टिनो हेडक्वार्टर से 50 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त किया था, जिनमें कुछ भारतीय भी शामिल थे। उन पर भी वित्तीय धोखाधड़ी और सैलरी में हेरफेर के आरोप लगे थे।

आगे की जांच पर सबकी नज़र

अब सभी की निगाहें एफबीआई और न्याय विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि फैनी मै की कार्रवाई केवल कंपनी नीति के तहत थी या इसमें किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया।

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