
चंडीगढ़: पंजाब पुलिस ने राज्य को 31 मई तक नशा-मुक्त बनाने के लिए व्यापक योजना तैयार कर ली है। डीजीपी गौरव यादव ने सभी जिलों के एसएसपी और सीपी को इस अभियान को तेजी से अंजाम देने के निर्देश दिए हैं। तय समय सीमा के बाद अभियान की समीक्षा की जाएगी, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
तीन प्रमुख रणनीतियों पर फोकस
हवाला नेटवर्क को तोड़ना: नशा तस्करी में शामिल हवाला ऑपरेटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। अब तक 31 हवाला ऑपरेटर गिरफ्तार किए गए हैं और 8 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जब्त की गई है।
अवैध संपत्ति जब्ती: नशे की कमाई से बनी संपत्तियों को NDPS एक्ट की धारा 268 के तहत अटैच किया जा रहा है।
सरकारी जमीन पर कब्जे की कार्रवाई: नशा तस्करों द्वारा अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी जमीन और इमारतों को खाली करवाया जा रहा है।
कड़ी सजा और बुलडोजर एक्शन
नशा तस्करी के 836 मामलों में अब तक 744 में सजा हो चुकी है, जिसमें 144 आरोपियों को 10 साल से अधिक की सजा मिली है।
पुलिस का कन्विक्शन रेट 90% तक पहुंच गया है।
नशा तस्करों द्वारा अवैध तरीके से बनाए गए 67 से अधिक आलीशान घरों पर बुलडोजर चलाए जा चुके हैं।
सीमा पर एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेष अदालतें
भारत-पाक सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे सितंबर-अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
नशा मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए 30 विशेष NDPS अदालतें बनाई जाएंगी, जिन पर राज्य सरकार 22.8 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
सीएम की सख्त निगरानी, जनता से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री भगवंत मान नशा मुक्ति हेल्पलाइन की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे के आदी लोगों का इलाज कराकर उन्हें नया जीवन दिया जाएगा, लेकिन तस्करों के खिलाफ कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
अब तक 4,659 FIR दर्ज और 7,414 तस्कर गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
DGP का स्पष्ट संदेश: “31 मई के बाद यदि किसी जिले में नशा तस्करी पाई जाती है, तो संबंधित एसएसपी और सीपी जिम्मेदार माने जाएंगे।”








