
- ढाका हाईकोर्ट ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दी
- चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी: बांग्लादेश में राजद्रोह का आरोप
- बांग्लादेशी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर, चिन्मय की रिहाई अस्थायी
ढाका। बांग्लादेश के ढाका हाईकोर्ट ने बुधवार को जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी। चिन्मय कृष्ण दास पिछले पांच महीनों से देशद्रोह के आरोप में बांग्लादेश की जेल में बंद थे। उनके वकील, अपूर्व कुमार भट्टाचार्य, ने 23 अप्रैल को जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने बुधवार को निर्णय लिया। हालांकि, चिन्मय की रिहाई फिलहाल संदिग्ध बनी हुई है, क्योंकि बांग्लादेशी सुप्रीम कोर्ट के पास इस फैसले पर रोक लगाने का अधिकार है।
रिहाई के बाद का हाल
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास के वकील का कहना है कि जमानत मिल जाने के बावजूद, यदि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर रोक नहीं लगाता, तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। चिन्मय दास पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप है और इस मामले में उनका 25 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
पिछले साल 25 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बांग्लादेश पुलिस ने चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार किया था, जब वे चटगांव जा रहे थे। इस्कॉन के सदस्यों ने दावा किया कि पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट नहीं दिखाया और उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के माइक्रोबस में बैठाकर ले गए। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रेजाउल करीम मल्लिक के मुताबिक, पुलिस के अनुरोध पर ही संत को गिरफ्तार किया गया था।
चिन्मय कृष्ण दास की पहचान
चिन्मय कृष्ण दास, जिनका असली नाम चंदन कुमार धर है, बांग्लादेश के चटगांव इस्कॉन के प्रमुख रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों के लिए कई रैलियों का आयोजन किया था।








