क्या शहरी इलाकों में खर्च के नए पैटर्न से सामाजिक असमानता बढ़ेगी?”

  • भारतीय घरों में खर्च की आदतों में बदलाव: क्या है मुख्य वजह
  • कैसे बढ़े खर्चों से शहरी इलाकों में खपत का पैटर्न बदल रहा है
  • क्या कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर खर्च बढ़ने का मतलब है बेहतर जीवनशैली

मुंबई।  भारत में उपभोक्ता खर्च की आदतें तेजी से बदल रही हैं। अब लोग पारंपरिक खर्चों जैसे रोटी, कपड़ा और मकान से आगे बढ़कर, समाज में अपनी स्थिति को बेहतर बनाने और शौकिया सामान (डिस्क्रेशनरी गुड्स) पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। विशेष रूप से शहरी इलाकों में यह बदलाव अधिक स्पष्ट देखा जा रहा है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर खर्च में जबरदस्त वृद्धि

सीएमएस इंफो सिस्टम्स द्वारा जारी की गई “कंजम्पशन रिपोर्ट 2025” के अनुसार, 2024-25 वित्तीय वर्ष में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर औसत मासिक खर्च में 72% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे मकान खरीदने और घर सजाने पर बढ़ते खर्चों को प्रमुख कारण बताया गया है। वहीं, पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर खर्च सिर्फ 6% बढ़ा था।

मल्टी-ब्रांड स्टोर से खरीदारी में वृद्धि, ई-कॉमर्स में गिरावट

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि मल्टी-ब्रांड स्टोर्स से महंगी शॉपिंग में बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में मल्टी-ब्रांड आउटलेट्स पर खर्च 12% बढ़ा, जबकि 2023-24 में इसमें 29% की गिरावट आई थी। इसके अलावा, FMCG (रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्त्र) पर खर्च 4% बढ़ा, जबकि पिछले साल इसमें कोई खास बदलाव नहीं आया था।

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