- विधेयक पर संसद में गरमागरम बहस, सरकार ने बताया पारदर्शिता लाने वाला कदम
- विपक्ष ने बताया संविधान विरोधी, सरकार ने कहा- वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने की पहल
- लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन विधेयक, सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक
- सरकार बोली- तुष्टिकरण की राजनीति का अंत, विपक्ष ने बताया धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला
नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किया गया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक को प्रस्तुत करते हुए इसे मुस्लिम समुदाय के लिए लाभकारी और पारदर्शिता लाने वाला बताया, जबकि विपक्ष ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
लोकसभा में विधेयक पेश होने के दौरान कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसका जोरदार विरोध किया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह कानून जबरन थोपा जा रहा है और इससे समुदाय विशेष की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
इस पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि यह विधेयक तुष्टिकरण की राजनीति का अंत करने वाला है और इसे किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह विधेयक किसी के अधिकारों का हनन नहीं करता, बल्कि वक्फ संपत्तियों के सुचारू प्रबंधन के लिए आवश्यक संशोधन लाया गया है।
सरकार के समर्थन में टीडीपी और जेडीयू
टीडीपी और जेडीयू जैसे सहयोगी दलों ने सरकार का समर्थन करते हुए विधेयक को जरूरी बताया। इन दलों ने कहा कि यह संशोधन वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष ने किया हंगामा
कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे संविधान विरोधी करार देते हुए सरकार पर धार्मिक भेदभाव करने का आरोप लगाया। विपक्ष ने मांग की कि इस विधेयक को विस्तृत चर्चा के लिए संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि सभी पहलुओं पर गौर किया जा सके।
आगे की राह
विधेयक पर चर्चा जारी है और सरकार इसे जल्द पारित कराने की रणनीति बना रही है। विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद, सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल है, जिससे इसके पारित होने की संभावना अधिक है। आने वाले दिनों में इस पर संसद में और अधिक तीखी बहस देखने को मिल सकती है।








