
बीजिंग। जनसंख्या में लगातार गिरावट से जूझ रहे चीन ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब नवजात शिशु के माता-पिता को करीब 1.30 लाख रुपए तक की नकद सहायता देगी। यह योजना 1 जनवरी 2025 से लागू होगी और इसके तहत तीन साल तक हर साल 3600 युआन (करीब ₹44,000) दिए जाएंगे।
सरकारी अखबार चाइना डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सब्सिडी तीन साल से कम उम्र के सभी बच्चों के लिए होगी, जिनकी चीनी नागरिकता है। योजना का लाभ पुराने बच्चों को भी मिलेगा, यदि वे तीन साल से कम उम्र के हैं। ऐसे में उन्हें उतने महीने के लिए सब्सिडी मिलेगी, जितनी अवधि वे योजना के दायरे में आते हैं।
यह पहली बार है जब चीन राष्ट्रीय स्तर पर समान बाल देखभाल सब्सिडी देने जा रहा है। इससे हर साल करीब दो करोड़ परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
जन्म दर में 50% की गिरावट, बुजुर्ग आबादी 21%
2016 में जहां चीन में 1.8 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ था, वहीं 2023 में यह आंकड़ा घटकर महज 90 लाख रह गया। 2024 में मामूली सुधार हुआ और यह संख्या 95 लाख हुई, लेकिन जनसंख्या में गिरावट जारी रही क्योंकि मृत्यु दर जन्म दर से अधिक रही।
देश की 21% आबादी अब 60 साल से ऊपर की है। यह असंतुलन चीन की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
राज्य स्तर की बजाय अब राष्ट्रीय योजना
अब तक कुछ राज्यों में दूसरी या तीसरी संतान पर सब्सिडी दी जाती थी, लेकिन नई योजना के तहत पहली, दूसरी और तीसरी संतान को समान रूप से आर्थिक मदद दी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे ज्यादा गिरावट पहली संतान के जन्म में दर्ज की गई है, इसीलिए यह योजना उस पर केंद्रित है।
हालांकि सरकार ने माना कि सिर्फ नकद सहायता पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ मातृत्व अवकाश, देखभाल सेवाएं, स्कूल और आवास जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करना जरूरी होगा।
अगस्त 2025 से आवेदन की प्रक्रिया शुरू
योजना के तहत अगस्त 2025 के अंत तक पूरे देश में सब्सिडी के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। केंद्र सरकार विभिन्न क्षेत्रों को उनके आर्थिक हालात के अनुसार मदद देगी। साथ ही, स्थानीय सरकारें चाहें तो अपनी तरफ से सब्सिडी की राशि बढ़ा सकती हैं, लेकिन उसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा।
वन चाइल्ड पॉलिसी के दुष्परिणाम से सबक
1979 में जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए चीन ने ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की थी। यह नीति 2016 तक लागू रही। इसके तहत एक से अधिक संतान होने पर भारी जुर्माना, नौकरी से बर्खास्तगी, यहां तक कि जेल का भी प्रावधान था।
इस नीति के दौरान जबरन नसबंदी, गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक समस्याएं पैदा हुईं। अनुमान है कि इस नीति से करीब 40 करोड़ बच्चों का जन्म रोका गया।
आज चीन को उसी नीति के दूरगामी परिणामों से जूझना पड़ रहा है – कामकाजी युवाओं की कमी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या।








