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मुर्शिदाबाद हिंसा पर राज्यपाल की नजर, दौरा टालने की ममता की अपील नाकाम
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हाईकोर्ट का सख्त रुख, सभी राजनीतिक दलों को दी चेतावनी
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बांग्लादेशी कट्टरपंथियों की एंट्री से भड़की हिंसा? जांच के घेरे में साजिश
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस शुक्रवार सुबह मुर्शिदाबाद और मालदा के लिए रवाना हो गए। वे अगले दो दिन हिंसा प्रभावित इलाकों और शरणार्थी शिविरों का दौरा करेंगे। रवाना होने से पहले राज्यपाल ने कहा, “मैं जमीनी हालात का जायजा लूंगा। जो कुछ भी हुआ, वह चौंकाने वाला है। किसी भी कीमत पर शांति स्थापित होनी चाहिए।”
इससे एक दिन पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल से दौरा टालने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि फिलहाल हालात सामान्य हो रहे हैं और गैर-स्थानीय लोगों को मुर्शिदाबाद जाने से बचना चाहिए। ममता ने खुद भी फिलहाल हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा न करने का फैसला लिया है। इधर, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर भी हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए मालदा रवाना हुई हैं।
हाईकोर्ट में सुनवाई, केंद्र ने CAPF की तैनाती बढ़ाने की मांग की
गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से मांग की कि मुर्शिदाबाद में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की तैनाती बढ़ाई जाए।
राज्य सरकार ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दावा किया कि “स्थिति अब नियंत्रण में है।” इस पर जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की बेंच ने सभी पक्षों—BJP, TMC और अन्य—को चेतावनी दी कि कोई भी भड़काऊ बयानबाज़ी न करे। कोर्ट ने कहा, “यह निर्देश सिर्फ किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, सभी पक्षों पर लागू होता है।”
विरोध प्रदर्शन की इजाज़त, लेकिन राज्य सरकार को चेतावनी
कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन साथ ही कहा कि “अगर राज्य सरकार अनुमति देती है, तो वह खुद समस्या को न्यौता दे रही है।”
हिंसा पीड़ितों के लिए बनेगी विशेष कमेटी
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि हिंसा से प्रभावित लोगों की पहचान, भोजन और रहने की व्यवस्था के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। यह समिति NHRC, WBHRC और SLSA के प्रतिनिधियों से मिलकर बनेगी।








