
कोपेनहेगन: Mette Frederiksen ने आम चुनाव में हार के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को हुई मतगणना में उनकी पार्टी सोशल डेमोक्रेटिक को केवल 38 सीटें मिलीं। हालांकि, देश में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है।
मेटे फ्रेडरिक्सन जून 2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री थीं और 2022 में दोबारा सत्ता में लौटी थीं। 41 साल की उम्र में वे देश की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री बनी थीं।
सादगी और बेबाकी से बनाई
Denmark की राजनीति में मेटे अपनी सादगी और स्पष्टवादिता के लिए जानी जाती हैं। रोजगार मंत्री रहते हुए वे साधारण कपड़ों में बच्चों को साइकिल से स्कूल छोड़ने जाती थीं, जिससे आम जनता में उनकी खास पहचान बनी।
ट्रम्प को ग्रीनलैंड मुद्दे पर दिया था जवाब
जनवरी 2026 में Donald Trump द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात उठाए जाने पर मेटे ने कड़ा रुख अपनाया था।
उन्होंने साफ कहा था कि “डेनमार्क बिकाऊ नहीं है” और देश की सुरक्षा के लिए सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा दी थी। उनके इस रुख ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
बचपन में झेली मुश्किलें, बनीं मजबूत नेता
मेटे बचपन में काफी संकोची थीं और हकलाने की समस्या से जूझती थीं, जिसके कारण उन्हें स्कूल में मजाक का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने स्पीच थेरेपी लेकर खुद को मजबूत बनाया।
15 साल की उम्र में उन्होंने एक शरणार्थी की मदद करते हुए कुछ लड़कों का सामना किया, जिसमें उन्हें चोट भी लगी और उनकी नाक की हड्डी टूट गई।








