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- मेधा पाटकर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया, बाद में कोर्ट ने रिहा किया
- प्रोबेशन बॉन्ड और एक लाख रुपए जुर्माना जमा करने की शर्त पर रिहाई
- 2000 में वीके सक्सेना पर की गई अपमानजनक टिप्पणी को लेकर मामला
दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख नेता मेधा पाटकर को गिरफ्तार किया था। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें प्रोबेशन बॉन्ड और एक लाख रुपए का मुआवजा जमा करने की शर्त पर रिहा कर दिया। यह गिरफ्तारी दिल्ली के निजामुद्दीन से की गई थी, और यह कार्रवाई उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दायर मानहानि याचिका के आधार पर की गई थी।
मेधा पाटकर को साकेत कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद गिरफ्तार किया। कोर्ट ने पाटकर को 23 अप्रैल को पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वह नहीं आईं और न ही जुर्माना राशि जमा की। इसके परिणामस्वरूप उनकी गिरफ्तारी हुई।
यह मामला 2000 का है, जब पाटकर ने वीके सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाए थे। पाटकर ने उन्हें ‘कायर’ कहा था और आरोप लगाया था कि वह हवाला लेन-देन में शामिल हैं। सक्सेना उस समय गुजरात में एक एनजीओ का नेतृत्व कर रहे थे, जो सरदार सरोवर परियोजना के पक्ष में था। पाटकर ने उनकी आलोचना करते हुए यह भी आरोप लगाया था कि सक्सेना ने एनबीए के विरोध प्रदर्शन का गुप्त रूप से समर्थन किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई गुजरात से दिल्ली ट्रांसफर कर दी थी और पाटकर के खिलाफ मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने उन्हें तीन महीने की सजा और एक लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था।