
- काशी में निर्जला एकादशी पर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बाबा विश्वनाथ का पवित्र जल से अभिषेक
- कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं और पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी शामिल
वाराणसी। काशी में आज निर्जला एकादशी का पवित्र व्रत धूमधाम से मनाया जा रहा है। ज्येष्ठ माह की यह एकादशी विशेष महत्व रखती है और इस दिन स्नान, दान और व्रत का विशेष विधान होता है। गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जो पवित्र स्नान एवं दान में भाग लेने पहुंची। इस अवसर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कार्यक्रम के तहत बाबा विश्वनाथ का अभिषेक सिंधु, चिनाब, रीवा, मानसरोवर और गंगा नदी के पवित्र जल से किया गया।
शोभा बढ़ाते हुए सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश रखकर बाबा विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचीं। कलश यात्रा राजेंद्र प्रसाद घाट से शुरू होकर पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई। पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी ने भी इस आयोजन में भाग लेकर इसका समर्थन किया।
आचार्य विकाश ने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत सभी तीर्थों में स्नान के समान फलदायक है। इस व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग करना अनिवार्य है। माना जाता है कि भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध यह व्रत सभी पापों से मुक्ति दिलाता है और मनुष्य को सफलता प्रदान करता है।
इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने के साथ गौदान, वस्त्र दान और जल से भरा कलश दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। व्रत के बाद द्वादशी तिथि को ब्रह्म बेला में उठकर स्नान और दान करना शुभ माना जाता है।
निर्जला एकादशी पर भक्त गीता और विष्णुसहस्रनाम का पाठ कर परम धाम की प्राप्ति की कामना करते हैं। यह पर्व काशी को न केवल भक्ति का केन्द्र बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनाता है।








