क्या वक्फ कानून से ‘मगरमच्छों’ का फंसना तय है

  • सरकारी कब्जे को वैध ठहराने की कोशिश: कल्बे जव्वाद का आरोप
  • ‘हुसैनाबाद ट्रस्ट की आय से हुआ घोटाला’ – मौलाना का दावा

  • जवाहर भवन और इंदिरा भवन पर भी उठा सवाल

लखनऊ। वक्फ कानून को लेकर बढ़ते विवाद के बीच लखनऊ में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुमा की नमाज अदा की गई। यह नया वक्फ कानून लागू होने के बाद दूसरा शुक्रवार रहा, जिसको लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर रही। बड़े इमामबाड़े के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। वक्फ कानून के विरोध में शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने एक बार फिर तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो वह सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे। मौलाना ने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों पर सरकार का अवैध कब्जा है और संशोधन बिल के जरिए सरकार इसे वैध ठहराना चाहती है।

हुसैनाबाद ट्रस्ट की आय से हुई अय्याशी

कल्बे जव्वाद ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 24 वर्षों से हुसैनाबाद ट्रस्ट सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन उसका कोई पारदर्शी उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “यहां के पैसे से शराब पी गई, अय्याशी हुई और करोड़ों का घपला किया गया। इमामबाड़े की सोने-चांदी की वस्तुएं डीएम की निगरानी में बेची गईं।”

कांग्रेस गुरु, बीजेपी शिष्य

मौलाना ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधते हुए कहा, “सभी सरकारें बेईमान रही हैं। कांग्रेस ने जवाहर भवन और इंदिरा भवन को वक्फ जमीन पर बनाया और अब भाजपा उसी रास्ते पर चल रही है। कांग्रेस गुरु है और भाजपा उसका शिष्य।”

मोदी के बयान पर पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि “वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए मुसलमानों के बच्चे पंचर बना रहे हैं”, कल्बे जव्वाद ने पलटवार करते हुए पूछा, “जब वक्फ की संपत्तियों पर सरकार का कब्जा है तो सही इस्तेमाल कैसे होगा? हमें यह बताया जाए कि कितने पंचर वालों की सरकार ने मदद की?” उन्होंने कहा कि वक्फ कानून में सिर्फ छोटी मछलियां ही नहीं, बल्कि मगरमच्छ भी फंसेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई

बता दें कि इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार और गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कई अहम सवाल उठाए और सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम समाज में लगातार असंतोष और बेचैनी देखी जा रही है।

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