- जिला अस्पताल में पूरी की गई चिकित्सकीय व कानूनी प्रक्रिया
- बाल कल्याण समिति ने जारी किया संरक्षण आदेश, समाज ने संवेदनशीलता का परिचय दिया
- एसएनसीयू वार्ड, पुलिस लाइन और स्थानीय पत्रकारों की रही अहम भूमिका
अम्बेडकरनगर। जब कोमल किलकारी किसी अंजान सड़क किनारे गूंजे, तो वह केवल एक बच्चा नहीं होता, वह समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला सवाल बन जाता है—और जब उस सवाल का उत्तर संवेदनशीलता से दिया जाए, तो वह उत्तर एक उम्मीद बन जाता है। बसखारी थाना क्षेत्र से मिले एक लावारिस नवजात को बुधवार को जिला अस्पताल से राजकीय बाल गृह शिशु, लखनऊ भेजा गया। यह केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं था, यह मासूम जिंदगी को गरिमा और गरमाहट देने वाली एक सांवेदनिक यात्रा थी।
नर्सिंग वार्ड से लेकर सुरक्षा वाहन तक — हर कदम पर इंसानियत की गवाही
शिशु के संरक्षण की प्रक्रिया में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी. एन. यादव, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अविनाश रस्तोगी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राम नायक वर्मा, सदस्या शकुंतला गौतम, सदस्य मनोज कुमार तिवारी, नर्स कुसुम और समस्त एसएनसीयू स्टाफ मौजूद रहे। इनकी उपस्थिति इस बात की गवाही थी कि जब मानवता जागती है, तब संवेदनशीलता आदेशों से नहीं, क्रियाओं से झलकती है।
दस्तावेज़ों से अधिक मूल्यवान थी मासूम की मुस्कान
बाल कल्याण समिति द्वारा तत्काल संरक्षण आदेश जारी किया गया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद सभी आवश्यक दस्तावेज़ पूरे कर विशेष सुरक्षा वाहन से नवजात को लखनऊ रवाना किया गया। वाहन में बैठाए जाने से पहले जब शिशु को गोद में उठाया गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में एक ही प्रार्थना थी—
“इस जीवन को अब सिर्फ ममता, सुरक्षा और भविष्य मिले।”
समाज की आंखों में नमी, लेकिन दिलों में विश्वास
यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि जब समाज के जिम्मेदार हाथ मिलते हैं, तब कोई भी बच्चा लावारिस नहीं रहता।
यह पहल दिखाती है कि संवेदनशील प्रशासन, जागरूक समाज और प्रतिबद्ध संस्थाएं जब साथ हों, तो हर मासूम को उसका अधिकार—सुरक्षा, सम्मान और स्नेह—मिल सकता है।








