
अंबेडकरनगर। जिले का ऐतिहासिक महात्मा गोविंद साहब मेला इस वर्ष प्रशासनिक निर्णयों के कारण विवादों में है। सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित यह मेला हर साल माहभर तक हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। लेकिन इस बार मनोरंजन संसाधनों पर रोक और गोविंद दशमी का स्थानीय अवकाश रद्द किए जाने से मेला संकट में दिखाई दे रहा है।
मनोरंजन संसाधनों पर रोक, श्रद्धालु और व्यापारी नाराज
मेले में वर्षों से झूले, स्टॉल और सांस्कृतिक मंच लगाए जाते रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और अश्लीलता बढ़ाने के आरोपों का हवाला देते हुए इस बार इनका संचालन प्रतिबंधित कर दिया। मेला समिति, व्यापारी और श्रद्धालु इस निर्णय से नाराज हैं। उनका कहना है कि मनोरंजन साधन मेले की पहचान और आर्थिक सहारा दोनों हैं।
गोविंद दशमी का अवकाश रद्द, परंपरा प्रभावित
इस वर्ष की स्थानीय छुट्टियों की सूची से गोविंद दशमी का सार्वजनिक अवकाश हटा दिया गया। यह अवकाश लंबे समय से जिले की परंपरा का हिस्सा रहा है और इस दिन धार्मिक अनुष्ठान और मेला गतिविधियां चरम पर होती थीं। अवकाश न होने से श्रद्धालुओं की संख्या में कमी और मेला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
मेला समिति और मठ ने उठाई मांग
मेला समिति, मठ के पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मनोरंजन साधनों की अनुमति और गोविंद दशमी अवकाश बहाल करने की मांग कर रहे हैं। प्रमुख लोगों में आनंद जायसवाल, अभिषेक निषाद, विनय पाण्डेय, भगवान पाण्डेय, राजवर्धन पाण्डेय, राजाबाबू गुप्ता, मेला समिति अध्यक्ष भौमेंद्र सिंह पप्पू, मठ महंत भगेलू दास सहित बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हैं।








