मुंबई हमले का आरोपी राणा भारत लाया जाएगा

  • सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण पर रोक की याचिका खारिज की, RAW और NIA की टीम लेकर आ रही भारत
  • हेडली के साथ राणा ने रची थी साजिश, मुंबई में ऑफिस खुलवाकर की थी आतंकी मदद
  • 14 साल की जेल काट चुका है राणा, अमेरिका की कोर्ट ने माना था लश्कर से जुड़ा

वॉशिंगटन। 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाने की प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो गई। जांच एजेंसी NIA और खुफिया एजेंसी RAW की एक संयुक्त टीम उसे लेकर स्पेशल फ्लाइट से भारत रवाना हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, राणा को देर रात तक दिल्ली लाया जा सकता है। भारत में उसे NIA की हिरासत में रखा जाएगा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा की उस याचिका को हाल ही में खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद को पार्किंसन बीमारी से ग्रसित बताते हुए भारत प्रत्यर्पण पर रोक की मांग की थी।

राणा को 2009 में FBI ने शिकागो से गिरफ्तार किया था। वह लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी बताया गया था और अमेरिकी अदालत ने उसे मुंबई और कोपेनहेगन आतंकी साजिशों में दोषी माना था। अब तक वह लॉस एंजिल्स के एक डिटेंशन सेंटर में बंद था।

मुंबई हमले में राणा की भूमिका
राणा का नाम NIA की 405 पन्नों की चार्जशीट में दर्ज है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, राणा ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली को आतंकी गतिविधियों के लिए मुंबई में ऑफिस खोलने में मदद की थी। इस ऑफिस की आड़ में हेडली ने मुंबई की रेकी की, जिसमें ताज होटल और CST स्टेशन शामिल थे — बाद में यहीं पर हमले हुए।

अमेरिकी सरकार ने भी कोर्ट में राणा की भूमिका को स्वीकार किया। सरकारी दस्तावेजों और ईमेल्स से यह साबित हुआ कि राणा ने हेडली को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए और भारत आने के लिए वीजा लेने की प्रक्रिया में मदद की।

भारत ने कैसे किया प्रत्यर्पण के लिए प्रयास
भारत ने 2011 में राणा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 2019 से लेकर 2021 के बीच भारत ने डिप्लोमैटिक चैनल्स के जरिए अमेरिकी सरकार से राणा के प्रत्यर्पण की मांग की। जून 2021 में अमेरिकी संघीय अदालत में भारत ने पुख्ता सबूत पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने प्रत्यर्पण की मंजूरी दी।

राणा का बैकग्राउंड
64 वर्षीय तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है। वह पहले पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर था और बाद में कनाडा और फिर अमेरिका में इमिग्रेशन सर्विस फर्म चलाने लगा। उसने फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज के नाम से कई ऑफिस खोले थे, जिनका इस्तेमाल आतंकी साजिशों में किया गया।

कोपेनहेगन हमले की भी साजिश रच चुका है राणा
2011 में राणा को डेनमार्क के एक अखबार पर हमले की साजिश का दोषी भी ठहराया गया था। यह वही अखबार था जिसने 2005 में पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून छापे थे। बाद में इसी घटना के आधार पर 2015 में फ्रांसीसी मैगजीन ‘चार्ली हेब्दो’ पर भी हमला हुआ था।

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