
अम्बेडकरनगर। जनपद के अकबरपुर ब्लॉक में तैनात कुछ सेक्रेटरियों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का दावा है कि ब्लॉक परिसर में स्थित आधिकारिक कमरों का उपयोग निजी कार्यालय की तरह किया जा रहा है। इन कमरों में 1-2 निजी कर्मचारी नियमित रूप से बैठते हैं, जो सरकारी फाइलों और योजनाओं से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
जानकारी के अनुसार, ये निजी कर्मचारी किसी भी प्रकार से सरकारी पेरोल पर दर्ज नहीं हैं। इसके बावजूद वे सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया, आवेदन की जांच और फाइलों की आवाजाही में दखल देते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब ये कर्मचारी आधिकारिक स्टाफ नहीं हैं तो इनके वेतन का भुगतान किस स्रोत से हो रहा है।
योजनाओं की फाइलों में ‘स्पीड मनी’ का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और भूमि विवाद से संबंधित फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर ‘स्पीड मनी’ ली जाती है। बिना भुगतान के फाइलों के लंबित रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि निजी कर्मचारी आवेदनकर्ताओं से सीधे संपर्क में रहते हैं और प्रक्रिया को तेज कराने के नाम पर धन की मांग करते हैं। यह भी आरोप है कि प्राप्त राशि का एक हिस्सा ऊपर तक पहुंचाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
वेतन का स्रोत बना चर्चा का विषय
सबसे बड़ा प्रश्न इन निजी कर्मचारियों के वेतन को लेकर उठ रहा है। चूंकि उनका कोई सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भुगतान किस मद से किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वेतन कथित तौर पर अवैध वसूली और कमीशन से जुटाई गई रकम से दिया जाता है।








