अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन ने शनिवार को कलेक्ट्रेट के निकट अम्बेडकर प्रतिमा प्रांगण में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों में पेंशन पुनरीक्षण और पेंशन से जुड़े अन्य मुद्दों को शामिल करने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि आयोग की शर्तों में पेंशनरों के हितों को नजरअंदाज किया गया है, जो पहले कभी नहीं हुआ था।
पहली बार वेतन आयोग के दायरे से बाहर हुआ पेंशन पुनरीक्षण
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि अब तक गठित सभी केंद्रीय वेतन आयोगों के संदर्भ बिंदुओं में पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों का उल्लेख हमेशा शामिल रहा है। यह पहली बार है जब वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने की तारीख से पहले सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के पेंशन पुनरीक्षण को आयोग के दायरे से बाहर रखा गया है।
उन्होंने इसे पेंशनरों के हितों की अनदेखी बताते हुए गहरी नाराजगी जाहिर की।
सातवें वेतन आयोग के संदर्भ में मिली थी पेंशन सुरक्षा
पेंशनर्स एसोसिएशन ने सातवें वेतन आयोग का हवाला देते हुए कहा कि 28 फरवरी 2014 को जारी संकल्प पत्र में आयोग को स्पष्ट रूप से पेंशन पुनरीक्षण और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के ढांचे की जांच का अधिकार दिया गया था।
इसमें उन सिद्धांतों का मूल्यांकन भी शामिल था, जिनके आधार पर पेंशन और अन्य लाभों की संरचना निर्धारित होनी चाहिए।
इसके अलावा उन कर्मचारियों की पेंशन संशोधन भी इसी दायरे में था, जो आयोग की सिफारिशों के प्रभावी होने से पहले सेवानिवृत्त हो चुके होते।








