पीयूष गोयल की आलोचना से भारतीय स्टार्टअप्स पर गहरी बहस

  • पीयूष गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स पर उठाए सवाल, चीन से तुलना को लेकर दी प्रतिक्रिया

  • स्टार्टअप्स के फाउंडर्स ने गोयल के बयान पर जताई आपत्ति, व्यापार और इनोवेशन की ओर दिया ध्यान

  • पीयूष गोयल के बयान पर कांग्रेस और स्टार्टअप्स की तीखी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के उस बयान पर विवाद छिड़ गया है, जिसमें उन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स की तुलना चीन से करते हुए कहा था कि क्या हम सिर्फ “दुकानदारी” करेंगे? उनके इस बयान पर कई स्टार्टअप संस्थापकों और कांग्रेस ने आपत्ति जताई है, जिसके बाद मंत्री ने सफाई दी है।

विवाद की पृष्ठभूमि:

  1. पीयूष गोयल का बयान:
    • 3 अप्रैल को ‘स्टार्टअप महाकुंभ’ में मंत्री ने कहा, “भारतीय स्टार्टअप्स फूड डिलीवरी, फैंटेसी स्पोर्ट्स और हाइपर-लोकल सेवाओं तक सीमित हैं, जबकि चीन इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर और AI जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रहा है।”
    • उन्होंने यह भी कहा, “क्या हमें केवल डिलीवरी बॉय बनकर रह जाना है, या तकनीकी नवाचार में अग्रणी बनना है?”
  2. स्टार्टअप संस्थापकों की प्रतिक्रिया:
    • जेप्टो के आदित पालिचा: “भारतीय कंज्यूमर इंटरनेट स्टार्टअप्स लाखों रोजगार पैदा कर रहे हैं और सरकार को टैक्स राजस्व दे रहे हैं।”
    • शादी डॉट कॉम के अनुपम मित्तल: “भारत में डीप टेक स्टार्टअप्स भी हैं, लेकिन उन्हें सपोर्ट सिस्टम की कमी है।”
    • ओला के भाविश अग्रवाल: “हमें आत्मचिंतन करने की जरूरत है। इनोवेशन पर जोर देना चाहिए।”
  3. राजनीतिक प्रतिक्रिया:
    • कांग्रेस ने गोयल के बयान को “स्टार्टअप्स की उपेक्षा” बताया और कहा कि सरकार नीतिगत सहयोग के बजाय आलोचना कर रही है।
    • मंत्री ने जवाब देते हुए कहा, “कांग्रेस भारत की सफलता से परेशान है। हमारे स्टार्टअप्स ने अच्छी प्रगति की है, लेकिन अब बड़ी छलांग लेने का समय है।”

विश्लेषण:

  • भारत बनाम चीन: चीन के स्टार्टअप्स हार्ड टेक्नोलॉजी पर फोकस करते हैं, जबकि भारत में कंज्यूमर-फेसिंग बिजनेस मॉडल प्रमुख हैं।
  • सरकार की भूमिका: क्या सरकार को डीप टेक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत समर्थन बढ़ाना चाहिए?
  • स्टार्टअप्स का पक्ष: कई भारतीय स्टार्टअप्स ने ग्लोबल लेवल पर सफलता पाई है, लेकिन अभी भी चुनौतियाँ मौजूद हैं।

आगे की राह:

  • सरकार और स्टार्टअप्स के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत।
  • इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग और मेंटरशिप प्रोग्राम्स पर ध्यान देना होगा।

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