थाईलैंड की सत्ता के नायक: पुलिस अधिकारी से प्रधानमंत्री बनने तक का सफर

  • सत्ता, संघर्ष और रणनीति: थाकसिन शिनवात्रा का असाधारण सफर
  • थाईलैंड की राजनीति में शिनवात्रा परिवार का वर्चस्व
  • तख्तापलट, निर्वासन और वापसी: थाईलैंड की सत्ता के मास्टरमाइंड

बैंकॉक | थाईलैंड के राजनीतिक इतिहास में थाकसिन शिनवात्रा का नाम बेहद प्रभावशाली शख्सियतों में गिना जाता है। एक पुलिस अधिकारी से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक और दो तख्तापलट झेलने के बावजूद सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रखने तक, उनकी कहानी किसी रोमांचक उपन्यास से कम नहीं है। उनके कड़े फैसलों और प्रभावी नेतृत्व ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई, लेकिन विवाद भी कम नहीं रहे।

थाकसिन शिनवात्रा: संघर्षों और सफलता की कहानी

थाकसिन शिनवात्रा का जन्म एक व्यापारिक परिवार में हुआ था। उनके पूर्वज चीन से थाईलैंड आए थे और उन्होंने रेशम व्यवसाय में अपनी पहचान बनाई। उनके पिता लोएट शिनवात्रा सांसद भी रहे, जिससे थाकसिन को कम उम्र में ही राजनीति का अनुभव मिला।

थाकसिन ने पुलिस सेवा से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में टेलीकॉम बिजनेस में कदम रखा। उनकी कंपनी ‘शिन कॉर्पोरेशन’ थाईलैंड की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर बन गई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और 2001 में थाईलैंड के प्रधानमंत्री बने।

कड़े फैसलों के लिए प्रसिद्ध

2003 में उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ अभियान छेड़ा, जिसमें हजारों अपराधियों को मौत के घाट उतार दिया गया। 2004 में मुस्लिम अलगाववादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए, जिससे कई लोगों की मौत हुई। इस फैसले ने जहां बौद्ध बहुल समाज में उनकी लोकप्रियता बढ़ाई, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी आलोचना भी हुई।

सत्ता से बेदखली और निर्वासन

2006 में सेना ने तख्तापलट कर उनकी सरकार गिरा दी। इसके बाद उन्होंने निर्वासन में 15 साल बिताए। इस दौरान उनकी बहन यिंगलक शिनवात्रा थाईलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन 2014 में उनका भी तख्तापलट हो गया।

सत्ता में वापसी और बेटी का उदय

2023 में थाकसिन शिनवात्रा ने थाईलैंड लौटकर अपनी पार्टी को फिर से मजबूत किया। उनकी बेटी पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा वर्तमान में थाईलैंड की प्रधानमंत्री हैं। कई लोग उन्हें अपने पिता की ‘कठपुतली’ मानते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं स्पष्ट हैं।

थाईलैंड में राजशाही और हिंदू संस्कृति का प्रभाव

थाईलैंड में राजा को ‘राम’ की उपाधि दी जाती है, क्योंकि उनकी संस्कृति पर हिंदू धर्म का प्रभाव है। वर्तमान में राजा महा वजिरालोंगकोर्न को रामा X कहा जाता है।

थाकसिन शिनवात्रा की कहानी बताती है कि सत्ता की राजनीति में बने रहने के लिए रणनीति और शक्ति दोनों की आवश्यकता होती है। दो बार सत्ता से बेदखल होने के बावजूद उनका परिवार आज भी थाईलैंड की राजनीति का सबसे प्रभावशाली नाम बना हुआ है।

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