गाजी मियां की दरगाह पर हिंदू-मुस्लिम श्रद्धालुओं की आस्था

  • 9 मई को पलंग पीढ़ी का जुलूस, बहराइच तक पैदल यात्रा
  • 1000 साल पुरानी मजार का ऐतिहासिक महत्व
  • धार्मिक एकता की मिसाल

वाराणसी। वाराणसी के सलारपुरा स्थित सैयद सालार मसूद गाजी की मजार पर 1023वां उर्स धूमधाम से शुरू हुआ। इस सालाना उर्स की शुरुआत हल्दी की रस्म से हुई, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग भाग लेने पहुंचे। इस रस्म को “जेठ के मेला” के नाम से भी जाना जाता है, और इसमें हर साल लाखों की संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। दरगाह के गद्दीनशीन अब्दुल्ला हाशमी के अनुसार, इस उर्स का आयोजन हर साल हल्दी की रस्म से शुरू होता है, जिसे “लक्खा मेला” भी कहा जाता है।

9 मई को होगा पलंग पीढ़ी का जुलूस, बहराइच तक जाएगी यात्रा
अब्दुल्ला हाशमी ने बताया कि 9 मई को पलंग पीढ़ी का जुलूस उठेगा, जो पैदल ही बहराइच स्थित मुख्य दरगाह तक जाएगा। इस जुलूस में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मिलकर यात्रा करेंगे। जुलूस के रास्ते में जगह-जगह रुककर लोग ठहरेंगे, और यह यात्रा धार्मिक एकता का प्रतीक होगी।

गाजी मियां की दरगाह पर सदियों से जुड़ी श्रद्धा, हर रविवार आते हैं भक्त
गाजी मियां की मजार पर हिंदू-मुस्लिम श्रद्धालुओं का आना कोई नई बात नहीं है। वाराणसी के विभिन्न इलाकों से लोग यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। हुकुलगंज के आशीष गुप्ता ने बताया कि वह हर रविवार गाजी मियां की मजार पर आते हैं और इस बार अपनी बहन की शादी का निमंत्रण गाजी मियां को अर्पित करने आए थे। इसी तरह लोहता की प्रीति गुप्ता और उनके पति भी वर्षों से यहां आ रहे हैं। उनका कहना है कि यह मजार सभी के लिए है और इनकी दरगाह पर आकर हर किसी को सुकून मिलता है।

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