
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के पक्ष में 6-3 से फैसला सुनाया
- निचली अदालतें अब पूरे देश में नीतियों पर रोक नहीं लगा सकेंगी
- बर्थ राइट सिटीजनशिप पर ट्रम्प का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 30 दिन तक स्थगित
वॉशिंगटन। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक बड़ी कानूनी राहत देते हुए कहा कि निचली अदालतों के जज पूरे देश में उनकी जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक नहीं लगा सकते। अदालत ने साफ किया कि फेडरल जज अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नीति नहीं रोक सकते, और उन्हें फिर से अपने आदेश पर विचार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के बहुमत वाले फैसले के मुताबिक, अब किसी भी नीति पर पूरे देश में रोक लगाने के लिए व्यापक आधार की जरूरत होगी, न कि केवल एक राज्य या व्यक्ति की याचिका से। हालांकि, कोर्ट ने ट्रम्प के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को 30 दिन तक लागू नहीं करने का निर्देश दिया है।
ट्रम्प ने जन्मजात नागरिकता रोकने का आदेश दिया था
डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जनवरी को शपथ ग्रहण के दिन ही एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया था, जिसका नाम था
‘Protecting the Meaning and Value of American Citizenship’।
इस आदेश के तहत तीन विशेष परिस्थितियों में अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता न देने का प्रावधान था।
हालांकि इसके कुछ दिन बाद ही तीन अलग-अलग फेडरल कोर्ट्स ने इस पर अस्थायी रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निचली अदालतों की सीमित भूमिका तय कर दी गई है।
जज एमी कोनी बैरेट ने लिखा फैसला
फैसले को लिखने वाली जस्टिस एमी कोनी बैरेट ने कहा—
“फेडरल कोर्ट्स का काम सरकार की निगरानी करना नहीं, बल्कि संसद द्वारा दी गई शक्तियों के दायरे में निर्णय देना है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट नीतिगत फैसलों की वैधता पर तत्काल टिप्पणी नहीं कर रहा, लेकिन निचली अदालतें पूरे देश में नीति लागू होने से नहीं रोक सकतीं।
ट्रम्प बोले- अब नीतियां तेजी से लागू करेंगे
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे “संविधान और कानून की जीत” बताया। उन्होंने कहा—
“अब हम उन नीतियों को तेजी से लागू करेंगे जिन्हें अनुचित तरीके से रोका गया था।”
ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के उन तीन जजों का भी आभार जताया, जिन्हें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान नियुक्त किया था।
अमेरिका में जन्म पर नागरिकता का इतिहास
1868 में 14वां संविधान संशोधन लागू किया गया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में जन्मे सभी व्यक्ति नागरिक माने जाएंगे।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य गुलामी झेल चुके अश्वेत अमेरिकियों को नागरिकता देना था।
समय के साथ इसकी व्याख्या सभी बच्चों पर लागू कर दी गई, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।
ट्रम्प का तर्क: बर्थ टूरिज्म और सिस्टम का दुरुपयोग
ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कई लोग बर्थ टूरिज्म के जरिए अमेरिका में बच्चे को जन्म दिलाकर नागरिकता का लाभ उठाते हैं।
उनके मुताबिक,
“बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता को अमेरिका में रहने का कानूनी आधार मिल जाता है।”
प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 रिपोर्ट बताती है कि अब तक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म के चलते नागरिकता मिल चुकी है।
भारतीय समुदाय पर संभावित असर
54 लाख भारतीय अमेरिका में रहते हैं, जिनमें से 2/3 फर्स्ट जेनरेशन इमिग्रेंट्स हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इनके बच्चों की नागरिकता की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
अगर ट्रम्प का आदेश 30 दिन बाद पूरी तरह लागू होता है, तो फर्स्ट जेनरेशन अप्रवासियों के बच्चों को जन्म से नागरिकता नहीं मिलेगी।
निचली अदालतों की भूमिका सीमित, लेकिन कानूनी लड़ाई जारी
फिलहाल, ट्रम्प का आदेश 30 दिनों तक प्रभावी नहीं रहेगा।
इस बीच, संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या को लेकर आने वाले हफ्तों में कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है।








