
- ट्रम्प क्यों पलटे अपने बयान से? जानिए पीछे की वजह
- क्या सच में अमेरिका ने भारत-पाक के बीच परमाणु युद्ध रोका
- कैसे एक आतंकी हमले ने भारत-पाकिस्तान को युद्ध के मुहाने पर ला दिया
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने को लेकर अपने पिछले बयान से पलटी मारी है। 10 मई को सीजफायर की अमेरिकी मध्यस्थता का दावा करने वाले ट्रम्प ने अब कहा है कि उन्होंने “मध्यस्थता नहीं, बल्कि मामला सुलझाने में मदद की”।
“मैंने समझौता करा दिया”
गुरुवार को कतर में पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, *”मैंने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता नहीं की, लेकिन मदद जरूर की। वे (भारत-पाक) 1000 साल से लड़ रहे हैं। मैंने कहा कि मैं समझौता करा सकता हूं… और मैंने करा दिया।”* उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच “मिसाइलों का आदान-प्रदान” शुरू हो गया था, लेकिन अमेरिका ने मामला शांत कर दिया।
पहले क्या कहा था ट्रम्प ने?
10 मई: ट्रम्प ने ट्वीट कर कहा था कि “अमेरिका की मध्यस्थता में भारत-पाकिस्तान तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए।”
11 मई: उन्होंने कश्मीर मुद्दे का “हल निकालने” की इच्छा जताई।
12 मई: दावा किया कि “हमने भारत-पाक के बीच परमाणु युद्ध रोका।”
13 मई: कहा कि “सीजफायर के लिए बिजनेस मॉडल का इस्तेमाल किया।”
भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले में 26 पर्यटक मारे गए।
7 मई को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी इलाकों में एयर स्ट्राइक कर 100+ आतंकियों को ढेर किया।
ट्रम्प ने दावा किया कि इसके बाद उनकी पहल से दोनों देशों ने युद्धविराम मान लिया।
क्या भारत ने मानी ट्रम्प की भूमिका?
भारत सरकार ने अब तक ट्रम्प के दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विदेश मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि “कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है।”








