
- बलूचिस्तान की आजादी, मीर यार बलूच का बड़ा ऐलान
- क्या बलूचिस्तान सच में होगा पाकिस्तान से अलग?
- मानवाधिकार हनन और बलूच संघर्ष की कहानी
बलूचिस्तान। बलूच नेता मीर यार बलूच ने बुधवार को पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा करते हुए दशकों से चले आ रहे मानवाधिकार उल्लंघन, अपहरण और हिंसा को इसका कारण बताया।
बलूचिस्तान का “राष्ट्रीय फैसला”
मीर यार बलूच ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि बलूचिस्तान के लोगों ने अपना “राष्ट्रीय फैसला” दे दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लिखा, “बलूच लोग सड़कों पर हैं। यह उनका स्पष्ट निर्णय है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। दुनिया अब मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती।”
उन्होंने भारत और वैश्विक समुदाय से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने और समर्थन करने की अपील की।
PoK पर पाकिस्तान की नीति की आलोचना
मीर यार ने भारतीय मीडिया और बुद्धिजीवियों से आग्रह किया कि वे बलूचों को “पाकिस्तानी” न कहें। उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तानी नहीं, बलूचिस्तानी हैं। पाकिस्तान के अपने लोग पंजाबी हैं, जिन्हें कभी हवाई हमले, अपहरण या नरसंहार का सामना नहीं करना पड़ा।”
उन्होंने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर इस क्षेत्र को खाली करने का दबाव बनाने की मांग की। मीर यार ने कहा, “भारत पाकिस्तानी सेना को हरा सकता है। अगर पाकिस्तान ने ध्यान नहीं दिया, तो PoK में होने वाली हिंसा के लिए पाकिस्तानी सेना के जनरल जिम्मेदार होंगे, क्योंकि वे वहां के नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।”
“बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध”
मीर यार ने दावा किया कि बलूचिस्तान को विदेशी ताकतों की मदद से जबरन पाकिस्तान में मिला लिया गया था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के दावों को नहीं मानना चाहिए।
उन्होंने बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर भी इशारा किया और कहा कि पाकिस्तानी सेना और पुलिस लगातार हमले कर रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी मीडिया की पहुंच वहां सीमित होने के कारण दुनिया को सच्चाई का पता नहीं चल पाता।
BLA का संघर्ष और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक सशस्त्र संगठन है जो बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा है। इसे कई देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन BLA का दावा है कि वह बलूच लोगों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए लड़ रहा है।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में कहा था कि बलूचिस्तान में केवल 1,500 “अशांत तत्व” हैं जो पाकिस्तान की लाखों की सेना के आगे कुछ नहीं कर सकते।
हालांकि, ब्रिटिश मानवाधिकार कार्यकर्ता पीटर टैचेल का मानना है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान की आजादी को टाल सकता है, लेकिन उसे हमेशा के लिए रोका नहीं जा सकता। उन्होंने इसकी तुलना वियतनाम के स्वतंत्रता संग्राम से की है।
मीर यार ने दावा किया कि बलूचिस्तान की आजादी अब केवल “दो कदम दूर” है और इसकी स्थिति 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम जैसी है। उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियां इस वास्तविकता को स्वीकार नहीं कर रही हैं।
क्या बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होगा?
इस सवाल पर विश्लेषकों के अलग-अलग मत हैं। कुछ का मानना है कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत के आगे बलूच आंदोलन को सफलता मिलना मुश्किल है, जबकि अन्य का कहना है कि बलूचिस्तान का संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है और अंततः पाकिस्तान को झुकना पड़ सकता है।








