
- किसान पथ पर जलती बस में फंसे कई यात्री
- तकनीकी जांच से खुल सकते हैं आग लगने के राज
- ड्राइवर-कंडक्टर फरार, सर्विलांस से हो रही ट्रैकिंग
लखनऊ। किसान पथ स्थित हिरकंशगढ़ी के पास गुरुवार तड़के चलती स्लीपर एसी बस में आग लगने की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है। पुलिस ने बस को तकनीकी जांच के लिए परिवहन विभाग की कार्यशाला भेज दिया है। वहीं हादसे के बाद से फरार चल रहे ड्राइवर और कंडक्टर की तलाश में पुलिस की टीमें बिहार और दिल्ली में दबिश दे रही हैं।
ड्राइवर-कंडक्टर की पहचान हुई, बिहार-दिल्ली में छापेमारी
मोहनलालगंज पुलिस के अनुसार, ड्राइवर की पहचान रामशंकर यादव और कंडक्टर की नीरज के रूप में हुई है। दोनों के संभावित ठिकानों का पता लगाने के लिए दो टीमों का गठन किया गया है।
एसीपी मोहनलालगंज रजनीश वर्मा ने बताया कि एक टीम बिहार के बेगूसराय, जबकि दूसरी दिल्ली में डेरा डाले हुए है। सर्विलांस और आरोपियों के करीबी रिश्तेदारों से पूछताछ के जरिए सुराग जुटाया जा रहा है।
घटना के बाद से दोनों के मोबाइल बंद हैं और उनका कोई अता-पता नहीं चल सका है। अधिकारियों के अनुसार, ड्राइवर-कंडक्टर की गिरफ्तारी और टेक्निकल जांच रिपोर्ट के बाद ही आग लगने की असल वजह सामने आ सकेगी।
हादसा कैसे हुआ?
गुरुवार सुबह 4:45 बजे चलती बस के इंजन में स्पार्किंग हुई और फिर धुंआ निकलने लगा। इससे पहले कि यात्री कुछ समझ पाते, तेज लपटों ने पूरी बस को घेर लिया। ज्यादातर यात्री उस वक्त नींद में थे और संकरे रास्ते के कारण कई लोग फंस गए।
बस का इमरजेंसी एग्जिट नहीं खुला, जिससे पीछे बैठे यात्री बाहर नहीं निकल पाए। ड्राइवर और कंडक्टर हादसे के बाद मौके से फरार हो गए।
दर्दनाक मौत: 5 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत
इस दिल दहला देने वाले हादसे में बिहार के सीतामढ़ी निवासी राम बालक के दो मासूम बच्चे — देवराज (4) और साक्षी (2), समस्तीपुर निवासी वृद्ध अशोक की बेटी सोनी (26), पत्नी लख्खी देवी (60) और मधुसूदन (26) की जिंदा जलकर मौत हो गई।
मृतक देवराज और साक्षी के पिता राम बालक ने मोहनलालगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें ड्राइवर, कंडक्टर और ट्रैवल पॉइंट एजेंसी के मालिक को गैर इरादतन हत्या (IPC की धारा 304) का आरोपी बनाया गया है।
अवैध बसों पर चला प्रशासन का डंडा
हादसे के बाद शुक्रवार को ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने मिलकर अवैध और डग्गामार बसों के खिलाफ अभियान चलाया।
डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित ने बताया कि यह अभियान पालिटेक्निक, कमता, बारा बिरवा और कानपुर रोड पर संचालित किया गया, जिसमें 25 बसों को सीज किया गया और 9 बस मालिकों का चालान किया गया है।








