
- कर्मचारियों की जान जोखिम में
- पानी आपूर्ति भी प्रभावित होने का खतरा
- निरीक्षण के बाद भी नहीं हुई मरम्मत
लखनऊ। नगर निगम के चौक क्षेत्र स्थित विक्टोरिया जोनल पंपिंग स्टेशन की जर्जर हालत ने वहां कार्यरत कर्मचारियों की जान जोखिम में डाल दी है। पचास साल पुरानी इस दो मंजिला इमारत की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं, छत का प्लास्टर झड़ रहा है और लोहे की सरिया बाहर निकल आई है। इसके बावजूद कर्मचारी जान हथेली पर रखकर यहां जल आपूर्ति का काम कर रहे हैं।
दीवारों में दरार, छत से गिर रहा प्लास्टर
पुरानी बिल्डिंग की छत पर उग आए पेड़-पौधों के चलते सांप-बिच्छू व कीड़े-मकोड़ों का डर बना रहता है। खिड़कियां टूटी पड़ी हैं और छज्जे कभी भी गिर सकते हैं। बावजूद इसके, यहां से 10 हजार से ज्यादा की आबादी को पानी आपूर्ति की जा रही है।
अंधेरे और खुले तारों के बीच काम
पंपिंग स्टेशन के अंदर अंधेरा पसरा रहता है। ग्राउंड फ्लोर पर पर्याप्त रोशनी तक की व्यवस्था नहीं है। कई जगह नंगे बिजली के तार पड़े हुए हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। दूसरी मंजिल पर लगी लाइटें भी पर्याप्त नहीं हैं, वहीं ट्रांसफॉर्मर रूम की शटर भी खराब है।
निरीक्षण के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय पार्षद अनुराग मिश्रा अन्नू ने कई बार पंपिंग स्टेशन की हालत को लेकर आवाज उठाई। जलकल के जीएम कुलदीप सिंह ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक किसी प्रकार की मरम्मत या सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ।
कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल
पंपिंग स्टेशन में बड़ी मशीनें लगी हैं, जिनका संचालन जोखिम भरा होता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि हर दिन उन्हें डर के साये में काम करना पड़ता है। ऐसे में अगर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
पार्षद की मांग है कि इस पंपिंग स्टेशन की मरम्मत या पुनर्निर्माण कार्य जल्द से जल्द कराया जाए, जिससे न सिर्फ कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके बल्कि पानी आपूर्ति भी बाधित न हो।








