आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन

  • सफाई कर्मियों से जातिगत टिप्पणी व बदसलूकी का आरोप
  • प्रोफेसरों पर प्लेट छीनने और पंडाल से भगाने का आरोप
  • विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में शनिवार को सफाई कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के दौरे के दौरान कथित तौर पर हुए अपमान और जातिसूचक व्यवहार के विरोध में हुआ। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे 20 अगस्त को होने वाले दीक्षांत समारोह में धरना प्रदर्शन करेंगे।

प्रोफेसरों पर अभद्रता और जातिगत टिप्पणी का आरोप
सफाई प्रभारी शेखर चौधरी ने बताया कि राज्यपाल के दौरे से पहले कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर की सफाई में दिन-रात मेहनत की थी। लेकिन कार्यक्रम के बाद जब कर्मचारी भोजन के लिए पहुंचे तो प्रो. शरद उपाध्याय, प्रो. अनिल गुप्ता और प्रो. संतोष बिहारी शर्मा ने उन्हें अपमानित किया और जातिवादी टिप्पणी करते हुए खाने से भगा दिया।

“हाथ से छीन ली गई प्लेटें, चाणक्य भवन से निकाला”
कर्मचारी धर्म सिंह ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर उनके हाथ से खाने की प्लेटें छीन ली गईं और चाणक्य भवन में लगे पंडाल से जबरन बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के बैठने और नहाने की कोई व्यवस्था नहीं है, और बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने अनदेखी की है।

“नाम बाबा साहब का, व्यवहार अपमानजनक”
कर्मचारियों ने कहा कि जिस विश्वविद्यालय का नाम बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर है, वहीं उनके अनुयायियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 20 अगस्त को राज्यपाल के समक्ष प्रदर्शन करेंगे और कामकाज ठप कर देंगे।

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