
- मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की भारी कमी, इलाज पर असर
- 255 में से सिर्फ 79 नर्सें, 176 पद खाली
- प्रोफेसर, एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर के 24 पद रिक्त
अम्बेडकरनगर। राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, सदरपुर की स्थापना जिले और आसपास के मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन स्टाफ की भारी कमी ने इस उद्देश्य को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं, परंतु डॉक्टरों, नर्सों और प्रशासनिक अधिकारियों के पद खाली होने से इलाज में बाधा आ रही है।
नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी, मरीजों पर पड़ रहा असर
मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के कुल 255 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 79 पदों पर ही तैनाती हुई है। 176 पद रिक्त होने के चलते वार्डों में मरीजों की देखभाल में दिक्कतें हो रही हैं। मरीजों के परिजनों को कई बार खुद बुनियादी देखरेख करनी पड़ती है।
नर्सिंग सेवाओं की कमी का असर खासकर आईसीयू, इमरजेंसी और वार्डों में अधिक देखा जा रहा है। मरीजों के उपचार में देरी और देखरेख की कमी से असंतोष बढ़ रहा है।
प्रोफेसर से लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर तक के पद रिक्त
शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं दोनों की गुणवत्ता पर असर डालने वाले चिकित्सकीय पदों की स्थिति भी चिंताजनक है:
प्रोफेसर के 24 में से केवल 10 पद भरे
एसोसिएट प्रोफेसर के 31 में से 21 पर तैनाती
असिस्टेंट प्रोफेसर के 60 में से 47 पदों पर कार्यरत
यानी कुल मिलाकर 87 पदों में से 24 पद रिक्त हैं। यह कमी मेडिकल कॉलेज के शिक्षण और क्लीनिकल सेवाओं दोनों को प्रभावित कर रही है।
प्रशासनिक ढांचे की स्थिति और भी गंभीर
मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रही है।
सीएमएस का पद खाली
चिकित्सा अधीक्षक के दो पद रिक्त
नर्सिंग अधीक्षक के दोनों पद खाली








