
- स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सवाल, मिलीभगत और उदासीनता के आरोप
- सीएमओ कार्यालय का प्रेस नोट और वास्तविक रिपोर्ट में विरोधाभास
- स्थानीय सूत्रों ने पहले भी शिकायतों और कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल
अंबेडकरनगर। जनपद के चर्चित रामा हॉस्पिटल पर फर्जीवाड़े और दस्तावेजी हेराफेरी के गंभीर आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अस्पताल में तैयार की गई एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर डॉक्टर के हस्ताक्षर उस तिथि में दर्ज हैं, जब आवेदन ही नहीं किया गया था। इस विसंगति के बावजूद विभाग जांच के नाम पर मूकदर्शक बना हुआ है।
रामा हॉस्पिटल के संचालन को लेकर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, रामा हॉस्पिटल स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी — डिप्टी सीएमओ — की पत्नी के नाम पंजीकृत बताया जा रहा है। इसी कारण अस्पताल से संबंधित शिकायतों को लेकर विभाग में उदासीनता का माहौल देखने को मिल रहा है। सूत्रों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बनी विवाद की जड़
मामला उस समय सुर्खियों में आया जब अस्पताल में तैयार की गई एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर दिनांक 21 सितंबर दर्ज पाई गई, जबकि सीएमओ कार्यालय से जारी प्रेस नोट में संबंधित डॉक्टर द्वारा 23 सितंबर को आवेदन किए जाने की बात कही गई है। इस विरोधाभास ने पूरे प्रकरण की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।









