- 5 नवंबर को मनाई जाएगी देव दीपावली, गंगा महोत्सव 1 से 4 नवंबर तक
- घाटों पर लेजर शो, सैंड आर्ट और ग्रीन आतिशबाजी का होगा आयोजन
- योगी बोले— आयोजन बने ‘क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी’ का प्रतीक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लखनऊ में काशी की देव दीपावली की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि “देव दीपावली काशी की सनातन परंपरा, गंगा आराधना और लोकआस्था का अद्भुत संगम है। यह पर्व केवल दीपों का नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और राष्ट्रभाव का प्रतीक है।”
सीएम ने निर्देश दिया कि देव दीपावली (5 नवंबर) और गंगा महोत्सव (1 से 4 नवंबर) की सभी तैयारियां समय पर पूरी हों। घाटों पर दीपदान, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था ऐसी हो कि श्रद्धा, अनुशासन और सौंदर्य का अद्भुत संगम दिखाई दे।
घाटों पर लेजर शो और सैंड आर्ट का आकर्षण
बैठक में बताया गया कि चेत सिंह घाट पर प्रतिदिन तीन बार 25 मिनट का लेजर शो आयोजित होगा। काशी विश्वनाथ घाट से चेत सिंह घाट तक सैंड आर्ट इंस्टॉलेशन बनाए जाएंगे। वहीं, विश्वनाथ धाम घाट के सामने ग्रीन आतिशबाजी और संगीत कार्यक्रम के साथ 10 मिनट का ग्रीन फायरक्रैकर शो होगा।
सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा घाटों पर अनुशासन और श्रद्धा की मिसाल बने, इसके लिए सुरक्षा, स्वच्छता, भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने संबंधित विभागों—नगर निगम, पर्यटन, पुलिस, जल पुलिस, संस्कृति, सिंचाई, विद्युत और स्वास्थ्य विभाग—को अपने दायित्व पूरी जिम्मेदारी से निभाने के निर्देश दिए।
स्मार्ट लाइटिंग और ड्रोन मॉनिटरिंग
योगी ने घाटों पर स्मार्ट लाइटिंग, फ्लोरल डेकोरेशन, थीम आधारित इंस्टॉलेशन, ड्रोन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था करने को कहा। साथ ही घाटों, गलियों और प्रमुख मार्गों की सफाई-सजावट पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम
सीएम योगी ने निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 एक्टिव रहे और कमांड सेंटर से सीसीटीवी फीड की निरंतर निगरानी की जाए। श्रद्धालुओं के लिए शौचालय, पेयजल, चिकित्सा सहायता और प्राथमिक उपचार केंद्र उपलब्ध हों। घाटों पर आपातकालीन नौका और एम्बुलेंस सेवाएं भी तैनात की जाएं।
“क्लीन, ग्रीन और डिवाइन काशी” की परिकल्पना
सीएम ने कहा कि देव दीपावली का आयोजन “क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी” की भावना को साकार करे। स्थानीय कलाकारों, विद्यालयों, महिला समूहों और धर्माचार्यों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोजन जनसहयोग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बने।








