
परेश रावल की फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ पर सियासी बवाल
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने BJP पर लगाया विद्वेष फैलाने का आरोप
बोले— “इतिहास को तोड़-मरोड़कर दिखाना BJP की आदत”
लखनऊ। दिग्गज अभिनेता परेश रावल की आने वाली फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ विवादों में घिरती जा रही है। अब समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजीलाल सुमन ने फिल्म के विषय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि BJP इस फिल्म के जरिए समाज में जानबूझकर विद्वेष और तनाव फैलाना चाहती है।
BJP पर लगाया इतिहास तोड़ने-मरोड़ने का आरोप
दैनिक भास्कर से बातचीत में सपा सांसद ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, इससे पहले भी BJP के नेता ताजमहल को तेजोमहालय बताने की बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “इतिहास को झुठलाना और सत्य के विपरीत बातें करना BJP की पुरानी आदत है। अब तो देश में वही पढ़ाया और दिखाया जा रहा है जो बीजेपी को अच्छा लगता है।”
रामजीलाल सुमन ने कहा कि ताजमहल दुनिया का ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे मुगल बादशाह शाहजहां ने बनवाया था, यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि जब भी मैं विदेश गया, वहां के लोग भारत के ताजमहल के प्रति सबसे ज्यादा आकर्षित नजर आए।”
“BJP का एजेंडा है समाज में तनाव फैलाना”
सपा सांसद ने आगे कहा कि BJP का उद्देश्य देश में आपसी तनाव फैलाना है। उन्होंने कहा, “इनका अपना कोई इतिहास नहीं है, इसलिए ये दूसरों के इतिहास को झूठा दिखाने का प्रयास करते हैं। यह उनके एजेंडे का हिस्सा है और मैं इसकी घोर निंदा करता हूं।”
फिल्म मेकर्स पर भी साधा निशाना
रामजीलाल सुमन ने कहा कि आजकल वही फिल्में बनाई जा रही हैं जो BJP की विचारधारा को सूट करती हैं। “सत्यता से इन फिल्मों का कोई संबंध नहीं है। जो लोग सत्ता में हैं, वही तय करते हैं कि कौन सी फिल्में बनाई जाएं,” उन्होंने कहा।
फिल्म का विवादित ट्रेलर
हाल ही में मेकर्स ने फिल्म का ट्रेलर जारी किया था, जिसमें ताजमहल से जुड़ी पारंपरिक धारणाओं पर सवाल उठाए गए हैं। दो मिनट के इस ट्रेलर में परेश रावल का किरदार एक हिंदू गाइड के रूप में दिखाया गया है, जो ताजमहल को मंदिर बताते हैं और इसके पीछे की “सच्चाई” उजागर करने का संकल्प लेते हैं।
परेश रावल निभा रहे हैं विष्णु दास का किरदार
फिल्म में परेश रावल ‘विष्णु दास’ की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि जाकिर हुसैन खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। मेकर्स ने फिल्म का पोस्टर रिलीज करते हुए लिखा था — “ताजमहल, मुगल वास्तुकला या भारतीय वास्तुकला? जब इंसाफ के पलड़े 400 साल पुराने इतिहास के खिलाफ झुक जाते हैं…”








