भ्रष्टाचार की स्याही से सना कटेहरी विकासखंड: माधवपुर ग्राम पंचायत में बदहाल नालियां, गंदगी का अंबार, प्रशासन मौन

अंबेडकर नगर, कटेहरी। कटेहरी विकासखंड में फैला भ्रष्टाचार अब केवल आरोप नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुका है। ग्राम पंचायत माधवपुर की स्थिति इस बात की गवाह है कि सरकारी योजनाएं कागजों में पूरी हो रही हैं, जबकि धरातल पर गांव बदहाली की मार झेल रहा है। गांव की नालियां जाम पड़ी हैं, सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है और साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये का बजट स्वीकृत होता है, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं किया जाता। कागजों में नालियों की सफाई, मरम्मत और निर्माण दर्शाया जाता है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य

ग्रामवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान राम कुमार से मौखिक और लिखित शिकायत की, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नालियों की सफाई न होने से गांव में जलभराव बना रहता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जो काम होते भी हैं, वे केवल औपचारिकता निभाने के लिए किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर सिर्फ फोटो खिंचवाकर कार्य पूर्ण दिखा दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं होता।

खंड विकास अधिकारी की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में कटेहरी के खंड विकास अधिकारी (BDO) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सवाल यह उठता है कि क्या विकासखंड स्तर पर किसी तरह का निरीक्षण नहीं किया जा रहा? यदि निरीक्षण होता है तो फिर ग्राम पंचायत माधवपुर की बदहाली अधिकारियों को क्यों नहीं दिखाई देती?

ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय-समय पर निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन किया जाए तो भ्रष्टाचार की परतें खुद-ब-खुद खुल जाएंगी।

योजनाएं कागजों में, गंदगी गांव में

स्वच्छ भारत मिशन सहित कई योजनाओं के अंतर्गत गांवों को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन माधवपुर की हालत इन दावों की पोल खोल रही है। नालियों में भरा कीचड़, सड़कों पर पसरी गंदगी और दुर्गंध प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:

  • ग्राम पंचायत माधवपुर के विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
  • ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
  • दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए
  • गांव में तत्काल प्रभाव से साफ-सफाई और नालियों की मरम्मत कराई जाए

क्या जागेगा प्रशासन?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा, या फिर भ्रष्टाचार की यह स्याही यूं ही गांव की किस्मत पर फैलती रहेगी?

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