
वीज़ा पर पाबंदी: भारतीय पासपोर्ट के साथ यात्रा की नई सच्चाई
क्या भारतीय पासपोर्ट के साथ विदेश यात्रा अब एक चुनौती बन गई है?
ट्रैवल व्लॉगर ने खोला भारतीय पासपोर्ट का कड़वा सच, क्या दुनिया में घट रही है उसकी अहमियत?
नई दिल्ली। जहां एक ओर भारत को वैश्विक मंच पर ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में अग्रसर बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की गिरती प्रतिष्ठा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में एक ट्रैवल व्लॉगर द्वारा साझा किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारतीय पासपोर्ट के साथ विदेश यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को उजागर किया है।
वायरल वीडियो में क्या है खास
वीडियो में व्लॉगर अपने हाथ में भारतीय पासपोर्ट लेकर दिखाई देते हैं और इस दस्तावेज की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा, “ये जो चीज मेरे हाथ में है न, इसकी कोई वैल्यू नहीं है। भले ही हम थाईलैंड, मलेशिया, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में वीजा-ऑन-अराइवल या बिना वीजा के जा सकते हैं, लेकिन जब बात विकसित और शक्तिशाली देशों की आती है, तो मुश्किलें शुरू हो जाती हैं।”
भारतीय यात्रियों के लिए बढ़ रही पाबंदियां
व्लॉगर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई देशों में भारतीय पासपोर्ट पर मिलने वाली वीजा सुविधाएं अब सीमित होती जा रही हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “चीन सिर्फ 24 घंटे का वीजा-फ्री ट्रांजिट देता है, जबकि अन्य देशों को 10 दिन तक की छूट मिलती है। जॉर्डन ने तो भारतीय पासपोर्ट देखकर एंट्री ही देने से मना कर दिया। मिस्र जैसे देश अब इनविटेशन लेटर मांगने लगे हैं।”
‘पासपोर्ट देखकर नजरों से तौला जाता है’
उन्होंने वीडियो में बताया कि कई बार सारे दस्तावेज, फ्लाइट टिकट और पैसे होने के बावजूद उन्हें एंट्री के वक्त अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ता है। “पासपोर्ट चेकिंग के दौरान मुझे ऊपर से नीचे तक देखा जाता है, घंटों इंतजार करवाया जाता है और कभी-कभी बिना वजह एंट्री से मना कर दिया जाता है।”
लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो ट्रैवल व्लॉगर ने इंस्टाग्राम पर साझा किया, जहां अब तक इसे 7 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “अमेरिकी वीजा को भारतीय पासपोर्ट की मान्यता क्यों माना जाता है?” इस पर यूजर्स ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं—कुछ ने इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर सवाल खड़ा किया, तो कुछ ने इसे व्लॉगर का अतिशयोक्ति भरा दृष्टिकोण बताया।








