
रामदेव का ‘शरबत जिहाद’ पर बयान: विवादों के घेरे में
रामदेव ने शरबत जिहाद को लेकर दिया नया बयान
रामदेव के बयान पर मुस्लिम नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया
मथुरा। पतंजलि के संस्थापक और योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने विवादास्पद ‘शरबत जिहाद’ बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी विशेष कंपनी या समुदाय का नाम नहीं लिया, लेकिन जिन्हें यह बात लागू होती है, उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। रामदेव ने शुक्रवार को मथुरा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। 3 अप्रैल को बाबा रामदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने पतंजलि के शरबत का प्रचार करते हुए कहा कि कुछ कंपनियां शरबत बेचकर मस्जिदें और मदरसे बनवाती हैं, जबकि पतंजलि के उत्पादों से गुरुकुल और आयुर्वेदिक शिक्षा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने इसे ‘शरबत जिहाद’ कहा और लव जिहाद, वोट जिहाद जैसे शब्दों का भी जिक्र किया।
हालांकि, रामदेव ने सीधे तौर पर किसी कंपनी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को हमदर्द जैसी कंपनियों के संदर्भ में देखा गया, जिनके उत्पादों की बिक्री से धार्मिक संस्थानों को फंडिंग मिलती है।
रामदेव ने कहा – “हम सनातनी हैं, हमें गौरव से जोड़ें”
रामदेव ने मथुरा में कहा, “हमदर्द जैसी कंपनियों को लगता है कि वे पूरी तरह इस्लाम को समर्पित हैं और मस्जिद-मदरसे बना रही हैं, तो उन्हें खुश होना चाहिए। लेकिन यहां बात सनातन धर्म की है, हमें समझना चाहिए कि किससे हमारा गौरव बढ़ रहा है और किससे इस्लाम का प्रचार हो रहा है। अगर किसी को इससे दर्द होता है, तो होने दो – यह शरबत जिहाद है तो है।”
12 अप्रैल को एक और वीडियो में उन्होंने कहा कि “मैंने किसी को आतंकवादी नहीं कहा, लेकिन यह सच है कि कुछ कंपनियों की इस्लाम के प्रति निष्ठा है। मैंने सिर्फ यह कहा कि सनातनियों को गुरुकुल बनाने पर ध्यान देना चाहिए।”
विरोध में उठीं आवाजें
- मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी (ऑल इंडिया मुस्लिम जमात) ने कहा कि “अगर रामदेव ‘जिहाद’ शब्द का इतना प्रयोग करेंगे, तो क्या वे ‘योग जिहाद’ या ‘पतंजलि जिहाद’ जैसे शब्द सुनने को तैयार हैं?”
- दिग्विजय सिंह (कांग्रेस नेता) ने आरोप लगाया कि “रामदेव अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए धर्म और नफरत का सहारा ले रहे हैं।” उन्होंने इस मामले में पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है, जिसमें एक तरफ रामदेव के समर्थक उनके बयान का बचाव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता और मुस्लिम संगठन इसे सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का प्रयास बता रहे हैं।








