
“पीजीआई दौरे पर मिली सड़कों पर लेटे मरीजों के परिजनों की तस्वीर, सीएम ने शुरू की व्यवस्था”
“गोरखपुर एम्स में सीएम योगी ने किया 44 करोड़ के रैन बसेरे का शिलान्यास, 500 बेड की सुविधा मिलेगी”
“सड़क पर सोना अमानवीय, गोरखपुर में मरीजों के परिजनों के लिए अब मिलेगी सुरक्षित जगह”
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गोरखपुर एम्स परिसर में 44 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े रैन बसेरे का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने एक भावुक किस्सा साझा करते हुए कहा कि एक बार पीजीआई लखनऊ के दौरे के दौरान उन्होंने मरीजों के परिजनों को सड़कों पर लेटे देखा, जिससे वे बेहद व्यथित हुए।
मुख्यमंत्री ने बताया, “जब मैंने पीजीआई डायरेक्टर से पूछा कि ये लोग सड़क पर क्यों हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि ये मरीजों के रिश्तेदार हैं और उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मैंने उसी वक्त तय किया कि इनकी व्यवस्था होनी चाहिए।” अगले ही दिन सीएम आवास पर सुबह 8 बजे बैठक बुलाकर अफसरों को निर्देश दिए। अवनीश अवस्थी को इसका जिम्मा सौंपा गया और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी की मदद से लखनऊ के पीजीआई, केजीएमयू और आरएमएल में तीन रैन बसेरे बनाए गए। अब गोरखपुर में भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
“सड़कों पर रहना अमानवीय स्थिति”
सीएम योगी ने कहा, “एम्स परिसर में करीब 1200 लोग ऐसे हैं, जिन्हें सड़कों या पटरियों पर रात बितानी पड़ती है। गर्मी में तपना, सर्दी में ठिठुरना या बारिश में भीगना – ये सब अमानवीय स्थितियाँ हैं। इसीलिए एक ऐसा मानवीय मॉडल खड़ा करना जरूरी है, जिसमें परिजन सुरक्षित रह सकें।”
उन्होंने कहा कि हर बड़े चिकित्सा संस्थान में रैन बसेरा, सस्ती कैंटीन, और स्वच्छ सुविधाएं होनी चाहिए ताकि मरीजों के परिजनों को कष्ट न हो। यह सामाजिक उत्तरदायित्व है।
डॉक्टरों को नसीहत: “हर मरीज को रेफर करना बंद करें”
सीएम योगी ने मेडिकल संस्थानों के डॉक्टरों को चेताया कि वे हर मरीज को रेफर करना बंद करें। उन्होंने कहा, “हर बार मरीज को लखनऊ भेज देना समाधान नहीं है। यहां के डॉक्टरों को रिस्क लेना होगा। हर मरीज एक नया अनुभव, नया नॉलेज होता है।”
उन्होंने कहा कि डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान उसकी संवेदना होती है। अगर संवेदना नहीं है तो उसे डॉक्टर कहलाने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए।
पावर ग्रिड दे रहा सहयोग, टेली मेडिसिन से जोड़ने की योजना
सीएम ने बताया कि पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इस रैन बसेरे के निर्माण में सहयोग कर रहा है। साथ ही लखनऊ में टेली मेडिसिन की सुविधा भी दी गई है। कोविड काल में तय किया गया था कि हर जिले में आईसीयू अनिवार्य होगा। इसी दिशा में अब तकनीक का उपयोग कर मेडिकल कंसल्टेशन को और सुलभ बनाया जा रहा है।
एम्स गोरखपुर की ओपीडी वर्तमान में 4 हजार तक पहुँच चुकी है और लक्ष्य है कि इसे 10 हजार तक पहुँचाया जाए। इसके लिए स्क्रीनिंग सेंटर बनाए जाएंगे और टेली मेडिसिन के ज़रिए जिलों के अस्पतालों को एम्स से जोड़ा जाएगा।








