मुर्शिदाबाद हिंसा पर सियासी संग्राम- कोर्ट और सरकार आमने-सामने

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राष्ट्रपति को आदेश देना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं
  • वक्फ कानून के विरोध में फैली हिंसा पर कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
  • हिंसा प्रभावित इलाकों में अब मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग की निगरानी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में हुई हिंसा के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने और केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर राष्ट्रपति को ऐसा कोई निर्देश नहीं दे सकता। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने याचिकाकर्ता से सवाल किया, “क्या आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति को आदेश दें?” बेंच ने यह भी कहा कि उन पर पहले ही अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के आरोप लग रहे हैं। गौरतलब है कि जस्टिस बीआर गवई अगले महीने भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं।

हाईकोर्ट का सुझाव और केंद्र की भूमिका

इस मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट में भी सुनवाई जारी है। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को मुर्शिदाबाद में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर आदेश सुरक्षित रखा था। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से संयुक्त टीम बनाकर हिंसा प्रभावित इलाकों के दौरे का सुझाव दिया है।  फिलहाल जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की 17 कंपनियां तैनात हैं। सुवेंदु अधिकारी ने विस्थापित लोगों की घर वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है।

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