क्यों बदल रहे हैं पावर कारपोरेशन के आउटसोर्सिंग नियम?

  • कंप्यूटर ऑपरेटरों की छंटनी की प्रक्रिया: पावर कारपोरेशन में बड़ी बदलाव की शुरुआत
  • कर्मचारियों के लिए अंधेरे भविष्य का संकेत: पावर कारपोरेशन में आउटसोर्सिंग की नई नीति
  • ‘असहाय मानव कंपनी’ से ‘मूलचंद कंस्ट्रक्शन कंपनी’ तक: आउटसोर्सिंग की नई दिशा

अम्बेडकरनगर ।  सरकारी नीतियों में बदलाव और ठेकेदारी व्यवस्था के नए प्रावधानों ने पावर कारपोरेशन के कंप्यूटर ऑपरेटरों की नौकरियों पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जिले के चारों सबडिवीजन और 15 विद्युत परीक्षण उपखंड कार्यालयों में कार्यरत 47 ऑपरेटरों को एक सप्ताह के भीतर हटाए जाने का निर्देश जारी हो चुका है।

पुरानी कंपनी हटी, नई कंपनी ने लिया कमरा

इन ऑपरेटरों की नियुक्ति आज़मगढ़ की ‘असहाय मानव कंपनी’ के माध्यम से की गई थी, लेकिन अब पावर कारपोरेशन के लखनऊ निदेशालय ने सेवा प्रदाता कंपनी बदलते हुए ‘मूलचंद कंस्ट्रक्शन कंपनी’ को आउटसोर्सिंग का ठेका दे दिया है। नई कंपनी ने अपने मानकों के तहत स्टाफ कटौती का फैसला लिया है।

नए नियम: एक उपखंड में सिर्फ एक, सबडिवीजन में तीन ऑपरेटर

नई कंपनी के दिशा-निर्देशों के अनुसार:

  • प्रत्येक सर्किल और सबडिवीजन कार्यालय में केवल तीन कंप्यूटर ऑपरेटर रखे जाएंगे।

  • प्रत्येक उपखंड कार्यालय में सिर्फ एक ही ऑपरेटर काम करेगा।

इस नए प्रावधान के बाद 47 में से अधिकांश कर्मचारियों की नौकरियां चली जाएंगी। अकबरपुर, जलालपुर, टांडा और आलापुर सहित अन्य कार्यालयों में काम कर रहे इन ऑपरेटरों के सामने अब बेरोजगारी का संकट मंडरा रहा है।

कर्मचारियों में रोष, भविष्य को लेकर चिंता

इस निर्णय की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी। वर्षों से विभाग का काम संभालने वाले इन ऑपरेटरों के पास न तो भविष्य की कोई योजना है और न ही सरकारी गारंटी कि उन्हें दूसरी जगह नौकरी मिलेगी।

कर्मचारियों का कहना है:
“हमने सालों तक ईमानदारी से काम किया, लेकिन अचानक बदली नीतियों ने हमारी नौकरी छीन ली। सरकार या प्रशासन की ओर से कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा।”

क्या होगा आगे?

अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमानुसार है और नई कंपनी अपने स्तर पर स्टाफ चयन करेगी। हालांकि, प्रभावित कर्मचारियों ने संगठित होकर इस मामले को उच्च स्तर तक उठाने की तैयारी की है। इस बदलाव से न केवल कर्मचारियों बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन कर्मचारियों की समस्याओं को ध्यान में लेते हुए कोई ठोस कदम उठाएगा।

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