
- 33 साल पुराने ज्ञानवापी केस में फिर आई देरी
- मूल वाद में वादी पक्षकार की बेटियों ने दी नई अर्जी
- वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग
वाराणसी। ज्ञानवापी प्रकरण से जुड़ा 1991 का पुराना मामला आज भी कानूनी पेंचों में उलझा हुआ है। लगातार याचिकाओं और पक्षकार बदलने की मांग के कारण मुकदमे की सुनवाई में विलंब होता जा रहा है। गुरुवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) भावना भारती की अदालत में एक अहम याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग की गई है।
बेटियों ने मांगी वादमित्र को हटाने की अनुमति
मूल वादी पंडित हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने और उनकी जगह नए प्रतिनिधि की नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि वादी पक्ष की मृत्यु के बाद अब उन्हें मुकदमे में पक्षकार बनाया जाए।
वादमित्र की नियुक्ति और आपत्ति
गौरतलब है कि पूर्व में पंडित सोमनाथ व्यास की मृत्यु के बाद विजय शंकर रस्तोगी को 2019 में स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर के वादमित्र के रूप में नियुक्त किया गया था। लेकिन अब याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे उचित प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं और कई भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।
नए वादमित्र के लिए दिए नाम
वादमित्र को हटाकर नए प्रतिनिधियों के रूप में याचिकाकर्ता ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभर नाथ मिश्रा, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और अश्विनी कुमार उपाध्याय के नाम सुझाए हैं।
कोर्ट में पिछली बहस
पिछली सुनवाई में बेटियों की ओर से अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने बहस की थी। वहीं, अनुष्का तिवारी की ओर से भी एक याचिका दाखिल की गई थी। वादमित्र रस्तोगी ने स्वयं को हटाए जाने की अर्जी का विरोध करते हुए औचित्य पर सवाल उठाए हैं।
आज होगी अहम सुनवाई
आज की सुनवाई में यह तय होगा कि वादमित्र की भूमिका में बदलाव होगा या नहीं। इस मामले में कोर्ट का फैसला मुकदमे की दिशा तय कर सकता है।









