सुप्रीम कोर्ट ने निर्वासन की प्रक्रिया पर लगाई रोक

  • परिवार का दावा- हमारे पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज
  • पांच सदस्य हिरासत में, सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में अपील का भी रास्ता खुला रखा

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में रहने वाले पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से आए एक परिवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। निर्वासन की कगार पर खड़े इस परिवार के लिए अदालत ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि जब तक केंद्र सरकार उनके दस्तावेजों की जांच नहीं कर लेती, तब तक किसी तरह की निर्वासन की कार्रवाई न की जाए।

यह मामला अहमद तारेक बट्ट और उनके परिवार से जुड़ा है, जो 1987 में POK से भारत आकर जम्मू-कश्मीर में बस गए थे। परिवार का दावा है कि उनके पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज मौजूद हैं, जबकि प्रशासन उन्हें वीजा अवधि समाप्त होने के कारण देश छोड़ने को कह रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के दस्तावेजों की गहराई से जांच की जाए और यदि याचिकाकर्ता इस प्रक्रिया से असंतुष्ट रहते हैं तो वे जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने देश में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी के तहत बट्ट परिवार के पांच सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया था।

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