क्या प्रशासन पार्क की विफलता से सीख लेगा या इसे अनदेखा करेगा?

  • सीवान का पार्क- 63 लाख की लागत पर प्रशासनिक लापरवाही
  • उद्घाटन के महज दो दिन बाद पार्क बंद, सुरक्षा पर उठे सवाल
  • पार्क में बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं

सीवान। जिले में 63 लाख रुपये की लागत से बना एक आधुनिक पार्क प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गया है। महज दो दिन पहले 29 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और सांसद विजयलक्ष्मी कुशवाहा ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन अब पार्क के सभी गेटों पर ताले लटके हुए हैं और आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है।

सुरक्षा व्यवस्था शून्य, बच्चों को फांदनी पड़ रही ग्रिल

उद्घाटन के बाद से ही पार्क में लगे झूले हटा दिए गए हैं। स्थानीय बच्चे लोहे की ग्रिल फांदकर अंदर घुसने को मजबूर हैं, जिससे उनके गिरकर चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। पार्क के बगल में एक गहरा तालाब है, जो बारिश के मौसम में और भी खतरनाक हो जाता है, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।

डीएम का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ विवादों में

इस पार्क को जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता ने अपना ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ बताया था और निर्माण के दौरान लगातार निरीक्षण भी किया था। लेकिन अब निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पार्क से जुड़े कर्मचारियों का दावा है कि “अगर इसे खोला गया, तो संरचनाएं टूट सकती हैं,” जो निर्माण में हुई गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।

63 लाख में क्या मिला? भ्रष्टाचार के आरोप

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिलाधिकारी की निगरानी में बने इस पार्क में इतनी खराब गुणवत्ता वाली सामग्री क्यों इस्तेमाल हुई? इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। लाखों रुपये खर्च करके बने इस पार्क का उद्घाटन होने के दो दिन बाद ही बंद होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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