बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच घटते स्टाफ की चुनौती- समाधान क्या है?

  • संविदा कर्मचारियों की कटौती से बिजली आपूर्ति पर मंडराया खतरा
  • संघ का आरोप- पुराने आदेशों को नज़रअंदाज़ कर रही हैं एमडी रिया केजरीवाल
  • काम का बोझ बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों की संख्या घटी

लखनऊ। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) में संविदा कर्मचारियों की छंटनी के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ ने जोरदार विरोध जताया है। संघ का आरोप है कि निगम की प्रबंध निदेशक (MD) रिया केजरीवाल पूर्व MD के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती कर रही हैं।

कर्मचारियों की संख्या में कटौती से आक्रोश

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2017 में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रों पर ग्रामीण क्षेत्रों में 20 और शहरी क्षेत्रों में 36 कर्मचारियों की तैनाती का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, MD रिया केजरीवाल ने इन संख्याओं को घटाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 12.5 और शहरी क्षेत्रों में 18.5 कर दिया है।

संघ का कहना है कि उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या में कटौती से काम का दबाव बढ़ेगा। इससे न केवल कर्मचारियों की दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी बिजली संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

संघ ने किया MD कार्यालय का घेराव

इस मुद्दे पर उग्र हुए संविदा कर्मचारियों ने प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में गोखले मार्ग स्थित MD मध्यांचल कार्यालय का घेराव किया। कर्मचारियों ने MD रिया केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके फैसले को वापस लेने की मांग की।

संघ ने चेतावनी दी कि अगर कर्मचारियों की छंटनी रोकी नहीं गई, तो पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करके इस मामले को हल करने की मांग की है।

आगे की कार्रवाई

संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार और बिजली विभाग से इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है।

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