क्या अब भी ग्रामीणों को मिलेगा मजबूत रास्ता या फिर एक और धोखा?

  • मरम्मत के नाम पर मज़ाक, सड़क बनी खतरे की घंटी
  • सिर्फ 800 मीटर का मरम्मत कार्य, बाक़ी सड़क को किया गया नज़रअंदाज़
  • कागज़ पर लाखों की लागत, ज़मीन पर धूल और गिट्टी

अम्बेडकरनगर। जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में गंभीर लापरवाही सामने आई है। कटहरी ब्लॉक के दरवन ग्रामसभा में बनी सड़क की हालत देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या करोड़ों रुपये की योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं?

सड़क बनी या सिर्फ लाखों रुपये बहाए गए?

दरवन ग्रामसभा के महावत का पुरवा-राज्जूपुर संपर्क मार्ग पर लगा नेम बोर्ड बताता है कि जून 2022 में यहां 7 लाख रुपये की लागत से 800 मीटर लंबी डामर सड़क का लेपन कार्य हुआ था। लेकिन ज़मीन पर हालात इसके उलट हैं। सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है, गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं और कई जगह बोल्डर तक दिखाई दे रहे हैं। ऐसी हालत में पैदल चलना भी मुश्किल है, वाहनों का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

आधा-अधूरा काम, पूरी कीमत

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के मुताबिक, यह सड़क कुल 1350 मीटर लंबी है, लेकिन मरम्मत सिर्फ 800 मीटर की ही हुई। बाकी 550 मीटर को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। जहां मरम्मत हुई, वहां भी काम इतना घटिया है कि ग्रामीण इसे “कागज़ी खानापूर्ति” बता रहे हैं।

कजरी में भी हालात बेहाल

इसी तरह, जगदीशपुर नोखा (कजरी) की सड़क पर भी डामर की जगह सिर्फ धूल और गिट्टी दिखती है। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे कार्यों में भ्रष्टाचार की गंध साफ़ महसूस होती है।

प्रशासन ने कहा—जांच होगी

मामले पर अपर मुख्य अधिकारी जितेंद्र तोमर ने कहा कि “शिकायत की जांच कराई जाएगी। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

सवाल: क्या ग्रामीणों की सुरक्षा से बढ़कर है कागज़ी खानापूर्ति?

लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़कों की दुर्दशा से साफ़ है कि धन का सही उपयोग नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि क्या जिला पंचायत इस मामले में जवाबदेही तय करेगी या ग्रामीणों को ऐसी टूटी सड़कों पर जोखिम उठाते रहना पड़ेगा?

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