ईरान में जंग के बीच फंसा बेटा- झांसी में मां की आंखें नम

  • बेटे की पत्नी और बच्चे दो माह पहले लौटे भारत, बेटा 20 जून को लौटने वाला था
  • युद्ध के चलते इंटरनेट बंद, बात कम हो रही, मां बोलीं- “बस फ्लाइट बंद न हो”
  • बहन ने कहा- “इजराइल ने पहले हमला किया, ईरान अब सिर्फ जवाब दे रहा है”

झांसी। इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने भारत के एक घर में मातम और चिंता की लहर दौड़ा दी है। झांसी की रहने वाली नसीमा बेगम का बेटा सैय्यद नकी अकसरी ईरान में बमबारी के बीच फंसा हुआ है। 11 वर्षों से धार्मिक पढ़ाई के लिए ईरान में रह रहे नकी की 20 जून को भारत वापसी तय थी, लेकिन उससे पहले ही वहां युद्ध भड़क उठा।

मां नसीमा बेगम ने बताया कि युद्ध की खबरों के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई है। लगातार बमबारी और धमाकों की खबरें सुनकर उन्होंने टीवी और मोबाइल देखना तक छोड़ दिया है।

“बेटा ठीक है, पर दिल में डर बैठ गया है”

नसीमा ने बताया, “शनिवार को बेटे से बात हुई थी। उसने कहा कि फिलहाल वह सुरक्षित है। लेकिन जहां वह है, वहां से कुछ ही किलोमीटर दूर मिसाइल हमले हो रहे हैं।”

नकी अकसरी इस समय ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 180 किलोमीटर दूर स्थित कोम शहर में हैं। हालांकि, वह अब वहां से कहीं और शिफ्ट हो गए हैं। मां को उसकी सटीक लोकेशन नहीं पता।

इंटरनेट बंद, संपर्क टूटा

नसीमा कहती हैं, “ईरान में इंटरनेट बार-बार बंद हो रहा है। बेटे से बात भी नहीं हो पा रही। बेटा कहता है- परेशान मत होना, मैं खैरियत से हूं। लेकिन जब बात नहीं होती तो मन घबरा जाता है।”

परिवार ने छोड़ा टीवी और मोबाइल

परिजनों का कहना है कि उन्होंने अब युद्ध की खबरें देखनी बंद कर दी हैं क्योंकि वह मनोबल तोड़ रही हैं।

20 जून को थी वापसी, बहन बोली- दुआ करिए फ्लाइट बंद न हो

नकी की बहन उम्मे कुलसूम रिजवी ने कहा, “भाई के पास इंडिया लौटने की फ्लाइट का टिकट है। 20 जून को उसे आना है। दुआ करिए कि फ्लाइट कैंसिल न हो और वह सकुशल लौट आए।”

“ईरान पर हुआ हमला, अब जवाब जरूरी है”

उम्मे कुलसूम ने कहा, “हमारे भाई ही नहीं, वहां और भी हिंदुस्तानी बच्चे हैं। सभी के लिए फिक्र हो रही है। इजराइल ने पहले हमला किया, ईरान तो अब सिर्फ जवाब दे रहा है। अब ईरान को सख्ती से जवाब देना ही होगा।”

परिवार की एक ही दुआ: बेटा सलामत लौट आए

झांसी में बैठा यह परिवार इन दिनों सिर्फ एक ही दुआ कर रहा है कि उनका बेटा नकी इस युद्ध के साए से सुरक्षित निकलकर 20 जून को अपने वतन लौट आए।

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