अमेरिकी सड़कों पर विरोध की लहर- लाखों लोगों की आवाज एकजुट

  • सरकारी नीतियों और टैक्स सुधारों पर गहरा असंतोष, सैकड़ों रैलियों में दिखा जनसैलाब

  • सामाजिक संगठनों और मजदूर यूनियनों का संगठित विरोध, सरकार को चुनौती

  • ‘हैंड्स ऑफ’ नारों के साथ नागरिकों ने किया शक्ति प्रदर्शन

    वाशिंगटन। अमेरिका के सभी 50 राज्यों में शनिवार को सरकार की नीतियों के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरे देश में करीब 1,400 विरोध रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें लाखों लोगों ने भाग लिया। इन प्रदर्शनों का आयोजन “हैंड्स ऑफ” अभियान के अंतर्गत किया गया, जो नागरिक अधिकारों की रक्षा और सरकारी फैसलों के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बना।

    इन विरोध प्रदर्शनों में करीब 6 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया था। प्रदर्शनकारियों ने नौकरियों में कटौती, मानवाधिकारों में हस्तक्षेप, और आर्थिक फैसलों पर विरोध जताया। इस अभियान में 150 से अधिक संगठन जुड़े, जिनमें मानवाधिकार समूह, मजदूर संघ, LGBTQ+ कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

    प्रदर्शन के दौरान कई लोग स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के प्रतीकात्मक रूप में दिखाई दिए और अपने मुंह पर पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया।

    मस्क और ट्रम्प के फैसलों पर तीखा रिएक्शन

    गौरतलब है कि अरबपति एलन मस्क, जो इस समय सरकारी कार्यक्षमता विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं, ने हाल ही में सरकारी ढांचे को छोटा करने की वकालत की थी। उनका कहना है कि इससे टैक्स देने वालों के अरबों डॉलर बचेंगे। वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि वह सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी योजनाओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स इनका लाभ अवैध प्रवासियों को दिलाना चाहते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर भारत समेत कई देशों पर अमेरिकी दबाव

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कुछ दिन पहले एक नई टैक्स नीति की घोषणा की थी, जिसमें भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला किया गया है। भारत पर 26%, चीन पर 34%, यूरोपीय यूनियन पर 20%, जापान पर 24%, और ताइवान पर 32% का टैरिफ लगाया गया है। ट्रम्प ने कहा कि “भारत मेरे मित्र मोदी के नेतृत्व में है, लेकिन अब सही व्यवहार जरूरी है।”

    इस पर भारत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उसकी अर्थव्यवस्था इस दबाव को झेलने में सक्षम है और प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। भारत अमेरिका की चिंता को समझते हुए इस पर बातचीत के लिए तैयार है।

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