- मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत, टेंडर रद्द करने की मांग
- एक ही फर्म को बार-बार अर्ह घोषित किए जाने पर सवाल
- टेंडर कमेटी की पहली बैठक में ही शुरू हुई अनियमितता
गोरखपुर। BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइप लाइन संचालन और अनुरक्षण से जुड़े टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। एक ही फर्म को बार-बार अर्ह घोषित कर टेंडर फाइनल करने की तैयारी की जा रही है। इस मामले को लेकर एक फर्म ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है और निष्पक्ष जांच कर टेंडर को निरस्त करने की मांग की है। मेसर्स बघेल मेडिकल स्टोर, जो वर्ष 2010 से कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई लाइन का कार्य कर रही है, ने मुख्यमंत्री, शासन और डीजी मेडिकल एजुकेशन को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
7 मार्च को जारी हुआ टेंडर, 8 फर्मों ने किया आवेदन
यह टेंडर 7 मार्च 2025 को जारी किया गया था, जिसमें नेहरू चिकित्सालय और सुपर स्पेशियलिटी के 200 बेड्स पर ऑक्सीजन पाइपलाइन के संचालन व अनुरक्षण के लिए फर्म का चयन होना था। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च थी, और कुल आठ फर्मों ने इसमें भाग लिया।
टेंडर कमेटी की तीन बैठकों में बदले फैसले
अब तक टेंडर कमेटी की तीन बैठकें हो चुकी हैं। आरोप है कि हर बैठक में अलग-अलग निर्णय लिए गए। पहली बैठक 15 अप्रैल को हुई थी, जिसमें वित्त नियंत्रक अशोक कुमार सिंह और डॉ. सुनील आर्या अवकाश पर थे।
इस बैठक में केवल सिग्मा मेडिटेक सर्विसेज को योग्य करार दिया गया, जबकि बाकी सभी 7 फर्मों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।
दूसरी बैठक में बदला फैसला, तीसरी में फिर पलटी
1 मई को हुई दूसरी बैठक में जिस कांपिटेंट मेडिकल सिस्टम को पहली बैठक में अयोग्य बताया गया था, उसे योग्य करार दिया गया। इस पर वित्त नियंत्रक अशोक कुमार सिंह ने आपत्ति जताई और कहा कि सिर्फ दो फर्मों के आधार पर वित्तीय बिड नहीं खोली जा सकती। उन्होंने टेंडर निरस्त करने की संस्तुति दी।
कमेटी में मतभेद, एकल निविदा पर सवाल
टेंडर कमेटी के भीतर भी इस प्रक्रिया को लेकर विरोध शुरू हो गया है। दो सदस्यों का कहना है कि यह पहली बार निकाला गया टेंडर है, ऐसे में एकल निविदा पर इसे फाइनल नहीं किया जा सकता।







