- ट्रंप का चौंकाने वाला बयान, चीन पर टैरिफ में कटौती की संभावना
- क्या अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध का अंत नजदीक है?
- चीन की अर्थव्यवस्था की हालत, क्या टैरिफ का असर अब दिखने लगा है?
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि वे चीन पर लगाए गए टैरिफ को कम कर सकते हैं। उन्होंने माना कि मौजूदा टैरिफ दरें इतनी अधिक हैं कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार प्रभावित हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चीन के साथ बातचीत शुरू करने की पहल नहीं करेंगे।
ट्रम्प का बयान: “कभी भी टैरिफ घटा सकता हूँ”
एनबीसी के एक शो में ट्रम्प ने कहा, “मैं कभी भी चीन पर टैक्स घटा सकता हूँ, क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनके साथ व्यापार करना मुश्किल होगा। हम व्यापार करना चाहते हैं।”
उन्होंने दावा किया कि चीन की अर्थव्यवस्था इस समय संकट में है। फैक्ट्रियों का प्रदर्शन 2023 के बाद से सबसे खराब स्थिति में है और निर्यात आदेशों में भारी गिरावट आई है।
अमेरिका-चीन टैरिफ युद्ध का असर
- ट्रम्प ने अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 145% तक कर दिया था।
- जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामान पर 125% टैरिफ लगाया।
- इस ट्रेड वॉर के कारण वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मची है और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का खतरा है।
“बातचीत की शुरुआत मैं नहीं करूँगा” – ट्रम्प
एनबीसी की एंकर क्रिस्टन वेल्कर के सवाल पर कि क्या वे चीन से बातचीत शुरू करने के लिए टैरिफ हटाएंगे, ट्रम्प ने जवाब दिया, “मैं ऐसा क्यों करूँ?”
हालांकि, उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन कोई भी समझौता तभी होगा जब वह “बराबरी की शर्तों पर” होगा।
चीन ने भी बातचीत के संकेत दिए
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि अमेरिका एकतरफा टैरिफ हटाए।
ट्रेड वॉर के अन्य प्रभाव
- बोइंग को झटका: चीन ने अपनी एयरलाइंस को बोइंग के नए विमान लेने से रोक दिया है।
- दुर्लभ धातुओं पर रोक: चीन ने 7 कीमती धातुओं (रेयर अर्थ मटेरियल) और उनसे बने चुंबकों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वैश्विक उद्योगों को झटका लग सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी है, लेकिन दोनों देशों ने बातचीत के लिए तैयार होने के संकेत दिए हैं। हालांकि, कोई भी पहल करने को तैयार नहीं दिख रहा। इस लड़ाई से वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।








