- अंजुमन असगरिया की अगुवाई, हजारों अजादार शामिल
- अलम, ताबूत और ऊंटों पर सजी अमारियों ने खींचा ध्यान
- मौलानाओं ने सुनाई कर्बला की रूदाद, नम हुईं आंखें
अंबेडकरनगर (हजपुरा)। जलालपुर तहसील के हजपुरा गांव में गुरुवार को 37वां वार्षिक जुलूस-ए-अमारी पारंपरिक शानो-शौकत के साथ निकाला गया। अंजुमन असगरिया के तत्वावधान में निकले इस मातमी जुलूस में हजारों की संख्या में अजादारों ने भाग लिया। अलम, ताबूत, शबीह-ए-रहवार और सजी हुई ऊंटों की अमारियों के साथ जुलूस पूरे गांव में भ्रमण करते हुए सम्पन्न हुआ।
शुरुआत में हुई रहवार की जियारत
जुलूस की शुरुआत मोहम्मद हाशिम (मद्दन) के आवास से हुई, जहां जीशान अली निजामाबादी एवं जुहैर सुल्तानपुरी ने 18 शबीह-ए-रहवार की जियारत कराई। यहां बड़ी संख्या में मोमनीन इकट्ठा हुए और मातमी फिजा के बीच इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को याद किया गया।
मौलानाओं ने पेश की कर्बला की रूदाद
दौराने जुलूस कई उलेमा-ए-कराम ने कर्बला के शहीदों की याद में तकरीरें कीं।
मौलाना सैयद मोहम्मद मेंहदी (आजमगढ़) ने हज़रत सकीना स.अ. की दर्दनाक शहादत और अहले हरम की कर्बला वापसी का जिक्र किया।
मौलाना सैयद कसीम आज़मी, मौलाना सैयद नूरुल हसन, मौलाना वसी हसन खान, मौलाना सैयद नदीम रज़ा ज़ैदी और मौलाना अकबर हुसैन कर्बलाई ने कर्बला की घटनाओं को विस्तार से बयान किया।
जैसे-जैसे कर्बला की रूदाद सामने आती गई, वैसे-वैसे अजादारों की आंखें नम होती गईं और मातम की आवाज़ें गूंजती रहीं।
अंजुमनों की सहभागिता से गूंज उठा हजपुरा
जुलूस में अंजुमन यादगारे हुसैनी सेथल बरेली, अंजुमन इमामिया बस्ती, अंजुमन सज्जादिया जलालपुर, अंजुमन आबिदिया नौगावां सादात और अंजुमन अज़ा-ए-हुसैन सुरौली (सुल्तानपुर) समेत कई मातमी अंजुमनों ने भाग लिया। अंजुमन असगरिया हजपुरा की अगुवाई में नौहाख्वानी व सीनाजनी का सिलसिला पूरे जुलूस में जारी रहा।








